नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) देश के इक्विटी वायदा-विकल्प बाजार में युवा कारोबारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एक अध्ययन के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में कुल व्यक्तिगत प्रतिभागियों में 30 वर्ष से कम उम्र के कारोबारियों की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत रही, जो चार साल पहले 31 प्रतिशत थी।
हालांकि, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा किए गए अध्ययन से यह भी पता चला कि इस युवा वर्ग में घाटा उठाने वालों की संख्या अधिक रही।
वित्त वर्ष 2025-26 में 30 वर्ष से कम उम्र के लगभग 89 प्रतिशत कारोबाली नुकसान में रहे, जबकि 60 वर्ष से अधिक उम्र के प्रतिभागियों में यह आंकड़ा 81 प्रतिशत था।
नियामक ने बताया कि कुल व्यक्तिगत वायदा-विकल्प कारोबारियों में लगभग तीन-चौथाई पांच लाख रुपये से कम की वार्षिक आय श्रेणी से ताल्लुक रखते थे। यह वर्ग कुल कारोबार के 43 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार था, लेकिन कुल घाटे में इसकी हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी।
इस आय वर्ग के लगभग 88 प्रतिशत कारोबारियों ने नुकसान उठाया, जबकि एक करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक आय वाले निवेशकों में 81 प्रतिशत नुकसान में रहे।
वायदा-विकल्प बाजार में भागीदारी का भौगोलिक फैलाव भी उतना ही आश्चर्यजनक रहा। वित्त वर्ष 2025-26 में छोटे शहरों के निवेशकों की हिस्सेदारी कुल व्यक्तिगत ट्रेडर्स में लगभग दो-तिहाई और कुल वायदा-विकल्प कारोबार में करीब आधी रही।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड परिसंपत्तियों में छोटे शहरों के निवेशकों की हिस्सेदारी केवल एक-चौथाई है, जो उनके व्यापक निवेश व्यवहार की तुलना में वायदा-विकल्प में जोखिम लेने की काफी अधिक भूख को दर्शाता है।
भाषा पाण्डेय
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