जेनरेटिव एआई, क्लाउड क्षेत्र में कुशल प्रतिभाओं की 60 प्रतिशत तक कमी: रिपोर्ट

जेनरेटिव एआई, क्लाउड क्षेत्र में कुशल प्रतिभाओं की 60 प्रतिशत तक कमी: रिपोर्ट

जेनरेटिव एआई, क्लाउड क्षेत्र में कुशल प्रतिभाओं की 60 प्रतिशत तक कमी: रिपोर्ट
Modified Date: September 29, 2026 / 09:14 pm IST
Published Date: September 29, 2026 9:14 pm IST

मुंबई, 29 सितंबर (भाषा) देश के प्रौद्योगिकी उद्योग में कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े कौशल वाले पेशेवरों की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा फासला है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में जेनरेटिव एआई और क्लाउड कौशल में 53-60 प्रतिशत तक प्रतिभाओं की कमी है।

टीमलीज डिजिटल की तरफ से जारी ‘डिजिटल कौशल एवं वेतन 2026-27’ रिपोर्ट के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के केवल 16 प्रतिशत पेशेवरों के पास एआई कौशल है।

रिपोर्ट में कहा गया कि चार प्रमुख कौशल श्रेणियों में क्लाउड में 55-60 प्रतिशत का सबसे बड़ा आपूर्ति अंतर है। इसके बाद जेनरेटिव एआई में यह अंतर करीब 53 प्रतिशत है। जेनरेटिव एआई प्रतिभाओं की मांग 2026 तक 10 लाख से अधिक भूमिकाओं तक पहुंचने की उम्मीद है।

साइबर सुरक्षा में कुशल प्रतिभाओं की कमी 25-30 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में अंतर घट रहा है लेकिन कमी अब भी महत्वपूर्ण है।

टीमलीज डिजिटल की यह रिपोर्ट 2026-27 के दौरान 37,000 प्रौद्योगिकी और डिजिटल भूमिकाओं के विश्लेषण पर आधारित है। इसमें वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी), प्रौद्योगिकी कंपनियों और पारंपरिक उद्योगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुशल पेशेवरों की कमी के बीच अधिक वेतन का लाभ एआई-केंद्रित और उत्पाद के लिए महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग भूमिकाओं को मिल रहा है। यह प्रवृत्ति करियर के शुरुआती चरण में भी दिखाई दे रही है।

जेनरेटिव एआई डेवलपर को दो साल के अनुभव पर 11.2 लाख रुपये सालाना का वेतन मिलता है, जो छह से आठ साल के अनुभव पर बढ़कर 34.5 लाख रुपये हो जाता है। डेटा इंजीनियर का वेतन इसी अवधि में 9.1 लाख रुपये से बढ़कर 29.6 लाख रुपये और तकनीकी सहायता इंजीनियर का वेतन 5.2 लाख रुपये से बढ़कर 14.6 लाख रुपये हो जाता है।

छह से आठ साल के अनुभव पर जेनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस से जुड़ी भूमिकाओं में वेतन 31-35 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। इन भूमिकाओं में वेतन एआई-समर्थन वाली भूमिकाओं की तुलना में करीब दोगुना है।

टीमलीज डिजिटल की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नीति शर्मा ने कहा, ‘‘एआई का इस्तेमाल करने की क्षमता अब बुनियादी जरूरत बन रही है और बाजार उन लोगों को अधिक महत्व दे रहा है जो वास्तविक कामकाज में एआई का निर्माण, संचालन और प्रबंधन कर सकते हैं।’

हालांकि, सिर्फ तकनीकी विशेषज्ञता ही अधिक वेतन तय नहीं करती है। एआई तकनीक से जुड़े काम और क्षेत्र विशेष के ज्ञान के साथ रचनात्मकता एवं बदलाव के अनुकूल होने जैसे मानवीय कौशल भी महत्वपूर्ण हैं। आज नौकरी के लिए जरूरी माने जाने वाले करीब 39 प्रतिशत कौशल वर्ष 2030 तक बदल सकते हैं।

शर्मा ने कहा कि एआई का इस्तेमाल बढ़ने के साथ मानवीय निर्णय क्षमता और नेतृत्व अधिक महत्वपूर्ण हो रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों की संख्या से ज्यादा उनके कौशल की गहराई मायने रखेगी।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


लेखक के बारे में