आरबीआई समिति ने राज्यों के डब्ल्यूएमए की कुल सीमा 11.2 प्रतिशत बढ़ाने की सिफारिश की

आरबीआई समिति ने राज्यों के डब्ल्यूएमए की कुल सीमा 11.2 प्रतिशत बढ़ाने की सिफारिश की

आरबीआई समिति ने राज्यों के डब्ल्यूएमए की कुल सीमा 11.2 प्रतिशत बढ़ाने की सिफारिश की
Modified Date: September 29, 2026 / 09:16 pm IST
Published Date: September 29, 2026 9:16 pm IST

मुंबई, 29 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एक समिति ने मंगलवार को राज्यों के बढ़ते बजट आकार को देखते हुए उनके अर्थोपाय अग्रिम (डब्ल्यूएमए) की कुल सीमा 11.2 प्रतिशत बढ़ाकर 67,839 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की।

डब्ल्यूएमए राज्यों को नकदी प्रवाह में अस्थायी असंतुलन से निपटने के लिए आरबीआई की ओर से दी जाने वाली अल्पकालिक सुविधा है। आरबीआई 1938 से ही राज्य सरकारों को यह सुविधा दे रहा है।

सुधीर श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पिछली सलाहकार समिति की सिफारिशों के आधार पर आरबीआई ने एक अप्रैल, 2022 से राज्यों के लिए कुल डब्ल्यूएमए सीमा 32,225 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 47,010 करोड़ रुपये कर दी थी।

इसके बाद राज्यों के वित्त सचिवों के एक समूह की सिफारिश पर एक जुलाई, 2024 से कुल डब्ल्यूएमए सीमा को बढ़ाकर 60,118 करोड़ रुपये कर दिया गया था।

सितंबर, 2025 में राज्य वित्त सचिवों के 35वें सम्मेलन में आरबीआई ने 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट जारी होने के बाद राज्य सरकारों के लिए डब्ल्यूएमए पर एक सलाहकार समिति गठित करने का निर्णय लिया था।

आई. एस. एन. प्रसाद की अध्यक्षता वाली इस समिति ने डब्ल्यूएमए सीमा तय करने के लिए कुल व्यय और राजस्व प्राप्तियों सहित विभिन्न राजकोषीय मानकों का विश्लेषण किया।

प्रसाद समिति का मानना है कि कुल व्यय के बजाय राज्यों की राजस्व प्राप्तियों के आधार पर डब्ल्यूएमए सीमा तय करना अधिक उपयुक्त है।

समिति ने अपनी अनुशंसा में कहा, “राज्यों के लिए कुल डब्ल्यूएमए सीमा को मौजूदा 61,008 करोड़ रुपये से संशोधित कर 67,839 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की जाती है, जो मौजूदा सीमा से 11.2 प्रतिशत अधिक है।”

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम


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