प. एशिया शांति समझौते पर अनिश्चितता के बीच सोना 2,800 रुपये टूटा, चांदी मजबूत

प. एशिया शांति समझौते पर अनिश्चितता के बीच सोना 2,800 रुपये टूटा, चांदी मजबूत

प. एशिया शांति समझौते पर अनिश्चितता के बीच सोना 2,800 रुपये टूटा, चांदी मजबूत
Modified Date: May 26, 2026 / 06:44 pm IST
Published Date: May 26, 2026 6:44 pm IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतें 2,800 रुपये टूटकर 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के कारण निवेशकों ने डॉलर की ओर अपना रुख कर लिया।

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 2,800 रुपये घटकर 1,62,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गई।

सोमवार को, सोने की कीमत 1,65,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘मंगलवार को सोने की कीमतें नीचे आ गईं और एक सीमित दायरे में रहीं, क्योंकि अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने सतर्कता का रुख अपनाया।’’

उन्होंने कहा कि कूटनीतिक मोर्चे पर कोई सफलता न मिलने के कारण अधिकांश प्रतिभागी बाजार से किनारा किये रहे। उन्होंने आक्रामक रुख अपनाने से परहेज किया और भू-राजनीतिक मोर्चे पर अधिक स्पष्ट संकेतों का इंतजार किया।

हालांकि, सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी की कीमत 2,000 रुपये बढ़कर 2,73,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गईं।

पिछले सत्र में यह 2,71,000 रुपये रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना लगभग एक प्रतिशत टूटकर 4,534.69 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी दो प्रतिशत से थोड़ा अधिक टूटकर 76.49 डॉलर प्रति औंस रह गई।

विश्लेषकों ने कहा कि बाजार का रुख तब कमजोर पड़ गया, जब दक्षिणी ईरान पर अमेरिका के नए सैन्य हमलों की खबरें आईं। यह सब तब हुआ जब कतर में सात सप्ताह पुराने संघर्ष-विराम को बनाए रखने के उद्देश्य से वार्ता चल रही थी।

इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया है, जो ईरान के हवाई क्षेत्र में घुस आया था। बातचीत में अनिश्चितता की स्थिति और बढ़ गई।

इन नए तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं, जिससे यह डर फिर से पैदा हो गया कि ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतें दुनिया भर में महंगाई के दबाव को बनाए रख सकती हैं और केन्द्रीय बैंकों को लंबे समय तक सख़्त मौद्रिक नीति बनाए रखने के लिए मजबूर कर सकती हैं।

सौमिल गांधी ने कहा कि किसी संभावित समझौते की दिशा में कोई भी प्रगति ऊर्जा बाज़ार में तनाव को कम कर सकती है और महंगाई की चिंताओं को दूर कर सकती है, जिससे कीमती धातुओं के लिए ज्यादा अनुकूल माहौल बन सकता है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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