जम्मू, छह जून (भाषा) जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की खूबसूरत भद्रवाह घाटी में शनिवार को दो दिवसीय लैवेंडर (नीलगंधा) महोत्सव की शुरुआत के साथ ‘पर्पल क्रांति’ की वापसी देखी गई।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने चौथे लैवेंडर महोत्सव का उद्घाटन करते हुए इस इलाके के लैवेंडर (नीलगंधा) की खेती और इसकी खुशबू पर आधारित उद्यमशीलता के राष्ट्रीय केन्द्र में बदलने की तारीफ की।
लैवेंडर की खेती और उससे जुड़े उद्योगों के तेजी से विकास को ‘पर्पल क्रांति’ कहा जाता है। इसे ‘पर्पल’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि लैवेंडर के फूल बैंगनी रंग के होते हैं।
सिंह ने ‘लैवेंडर मिशन’ की सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘स्टार्टअप इंडिया’ और विज्ञान पर आधारित विकास के दृष्टिकोण को दिया और कहा कि इसने भद्रवाह, जिसे ‘मिनी कश्मीर’ भी कहा जाता है, को भारत के आर्थिक विकास में उसकी अहम भूमिका के लिए एक अलग पहचान दी है।
सीएसआईआर-इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (सीएसआईआर-आईआईआईएम), जम्मू ने ‘लैवेंडर गोज ग्लोबल’ विषय के तहत यह महोत्सव आयोजित किया।
इस महोत्सव में भद्रवाह के एक पारंपरिक खेती वाले इलाके से आगे बढ़कर देश में ‘लैवेंडर’ की खेती और सुगंधित उद्यम के अग्रणी केन्द्र में बदलाव को रेखांकित किया गया।
इस पहल के आर्थिक असर पर जोर देते हुए, मंत्री ने कहा कि लैवेंडर की खेती से जुड़े कई युवा उद्यमी खेती, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित उत्पादों के विपणन से अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं।
एक विकसित भारत के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि ‘एरोमा मिशन’ हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र से करीब से जुड़ा है और इस इलाके में टिकाऊ विकास में योगदान देता रहेगा।
उन्होंने आगे कहा कि जो जम्मू और कश्मीर में शुरु हुआ था, वह अब हिमाचल प्रदेश,उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों तक फैल गया है।
मंत्री ने बताया कि फ्रांस के ग्रास में अंशधारकों के साथ बातचीत चल रही है, जिसे दुनिया की इत्र राजधानी माना जाता है, ताकि भारत में लैवेंडर उत्पादन को बढ़ाने और साझेदारी की संभावना तलाशी जा सके।
भाषा राजेश राजेश संतोष
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