बेंगलुरु, 25 फरवरी (भाषा) सरकार देश में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी को लंबे समय तक समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है और यह प्रयास उन्नत देशों की तरह अगले दो दशक तक जारी रह सकता है। एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अमितेश सिन्हा ने ‘आईईएसए विजन समिट 2026’ को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि सरकार जल्द ही एक ऐसा पोर्टल शुरू करने जा रही है, जिसके माध्यम से सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों के विक्रेताओं को ‘एकल खिड़की मंजूरी’ की सुविधा मिलेगी।
उन्होंने कहा, “यह एक लंबी अवधि का खेल है। भारत यहां दो-तीन वर्षों के लिए नहीं, बल्कि 20-25 वर्षों के लिए है। दुनिया में जिन देशों के पास उन्नत सेमीकंडक्टर विनिर्माण संयंत्र हैं, उन्होंने भी अपने उद्योग को दो से पांच दशक तक समर्थन दिया है। यह टी-20 नहीं, एक मैराथन है और हम इसके लिए तैयार हैं।”
सिन्हा ने बताया कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 1.0 के तहत कुछ अन्य परियोजनाओं को अगले महीने तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। इसके बाद आईएसएम 2.0 शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आईएसएम 2.0 के तहत अधिक पारिस्थितिकी साझेदारों को जोड़ा जाएगा और मौजूदा निवेशकों के साथ भी उनकी परियोजना का विस्तार करने पर चर्चा चल रही है।
उन्होंने कौशल विकास पर जोर देते हुए कहा कि उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित कर सेमीकंडक्टर-केंद्रित पाठ्यक्रम विकसित किया जाएगा। सरकार भी इस पहल में भागीदार होगी।
उन्होंने कहा कि उद्योग की जरूरतों के हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार करने से डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग के साथ उपकरण निर्माण, शोध एवं विकास, रसायन, गैस और सामग्री से जुड़े इंजीनियर एंव ऑपरेटर की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
अतिरिक्त सचिव ने स्वीकार किया कि भारत में सेमीकंडक्टर इकाइयों को सामग्री या उपकरण उपलब्ध कराने आ रही कुछ विदेशी कंपनियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इन मुद्दों के समाधान के लिए सरकार आईएसएम के तहत एक ‘एकल खिड़की’ पोर्टल शुरू करने जा रही है, जिससे सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों के विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं को मंजूरी और नीतिगत सवालों के समाधान में सुविधा मिलेगी।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय