नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि वह निर्यात-आयात के रुझानों और क्षेत्रीय तनाव संकेतकों पर नजर रखने के लिए एक साप्ताहिक निगरानी तंत्र स्थापित करेगा।
यह कदम इन चिंताओं के बीच उठाया गया है कि वैश्विक तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, लॉजिस्टिक बाधाएं और बढ़ती लागत से उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।
इस क्रम में नौ मार्च को आयोजित दो अलग-अलग बैठकों में निर्यातकों ने पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र, विशेष रूप से पश्चिम एशिया क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही में आ रही बाधाओं पर चर्चा की।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में पैकेजिंग सामग्री और उससे जुड़े कच्चे माल की कमी से पैदा चुनौतियों पर विचार किया गया। बैठक में यह देखा गया कि मौजूदा वैश्विक घटनाक्रम पॉलीमर और रेजिन जैसे प्रमुख पेट्रोकेमिकल सामग्री की उपलब्धता और कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। इस वजह से सभी क्षेत्रों में पैकेजिंग सामग्री महंगी हो सकती है।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण सामग्री की कीमतों में वृद्धि का जिक्र किया, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर विशेष दबाव पड़ रहा है। निर्यातकों ने कहा कि लॉजिस्टिक की बाधाएं और बढ़ती लागत परिधान, चमड़ा, दूरसंचार और चिकित्सा उपकरणों जैसे उद्योगों को प्रभावित कर सकती हैं।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि संबंधित पक्षों ने नकदी में सुधार के लिए जीएसटी रिफंड को जल्द जारी करने के साथ ही एलएनजी, हीलियम और पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव जैसी महत्वपूर्ण सामग्री की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के लिए कहा है।
भाषा पाण्डेय रमण
रमण