सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना बोली आकर्षित करने में रही विफल

सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना बोली आकर्षित करने में रही विफल

सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना बोली आकर्षित करने में रही विफल
Modified Date: September 4, 2026 / 05:26 pm IST
Published Date: September 4, 2026 5:26 pm IST

नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) कोयला से गैस बनाने की परियोजना को बढ़ावा देने के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी 37,500 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रोत्साहन योजना के तहत अब तक कोई बोली नहीं आई है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि सात सितंबर की समय सीमा के बावजूद, इस कार्यक्रम के तहत परियोजनाएं स्थापित करने के लिए किसी भी निजी या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी से कोई आवेदन नहीं मिला है। ऐसे में 7.5 करोड़ टन कोयले और लिग्नाइट के गैसीकरण के कोयला मंत्रालय के प्रयास की व्यावहारिकता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

कोयला मंत्रालय को इस संबंध में भेजे गए सवालों का फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है।

कोयला मंत्रालय ने एक नोटिस में कहा था कि ”सतही कोयला, लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रोत्साहन योजना के तहत सात जुलाई, 2026 को अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) जारी किया गया था, जिसमें आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि सात सितंबर, 2026 है।”

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पहले कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना और एलएनजी, यूरिया तथा मेथनॉल के आयात पर निर्भरता को कम करना और देश को आपूर्ति शृंखला के व्यवधानों से बचाना था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 37,500 करोड़ रुपये के व्यय के साथ सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी थी।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण


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