सरकार ने अल नीनो की चिंता के बीच 2026-27 के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य 26.3 लाख टन घटाया

सरकार ने अल नीनो की चिंता के बीच 2026-27 के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य 26.3 लाख टन घटाया

सरकार ने अल नीनो की चिंता के बीच 2026-27 के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य 26.3 लाख टन घटाया
Modified Date: September 29, 2026 / 08:10 pm IST
Published Date: September 29, 2026 8:10 pm IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) सरकार ने मंगलवार को अल नीनो मौसम की चिंताओं के बीच 2026-27 के फसल वर्ष (जुलाई-जून) के लिए अनाज उत्पादन लक्ष्य को घटाकर 37 करोड़ 39.3 लाख टन कर दिया है।

अनाज उत्पादन का कुल लक्ष्य फसल वर्ष 2025-26 में हासिल किए गए 37 करोड़ 65.6 लाख टन के वास्तविक उत्पादन से 26.3 लाख टन कम है। लेकिन इस साल तय किया गया लक्ष्य, फसल वर्ष 2025-26 के लिए तय 36.2 करोड़ टन के लक्ष्य से अब भी अधिक है।

फसल वर्ष 2026-27 के लिए तय कुल लक्ष्य में से, वर्ष 2026 के खरीफ सत्र के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य 19 करोड़ 62.1 लाख टन और रबी फसल सत्र के लिए 17 करोड़ 77.2 लाख टन है।

भारत खरीफ (गर्मी) और रबी (सर्दी) मौसम में अलग-अलग खाद्य फसलें उगाता है। धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई हाल में पूरी हुई है, जबकि गेहूं जैसी रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर से शुरू होगी।

चौहान ने यहां दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अल नीनो स्थितियों के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर, फसल वर्ष 2026-27 के लिए 37 करोड़ 39.3 लाख टन का कुल राष्ट्रीय अनाज उत्पादन लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें रबी सत्र के लिए 17 करोड़ 77.2 लाख टन का लक्ष्य शामिल है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि अनाज उत्पादन लक्ष्य पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी को ध्यान में रखकर और प्रतिकूल परिस्थितियों में फसल पद्धति को समायोजित करने के लिए राज्यों के साथ परामर्श करके तय किए गए हैं।

जहां तक ​​रबी की बुवाई का सवाल है, मंत्री ने कहा कि योजना बनाते समय अल नीनो स्थितियों, सूखे और हाल ही में समाप्त हुए खरीफ सत्र के दौरान कुछ हिस्सों में आई बाढ़ की चुनौतियों को ध्यान में रखा जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मकसद उन इलाकों में ज्यादा पानी वाली फसलें नहीं उगाना है जहां बारिश कम हुई है और जहां जलाशय का स्तर और मिट्टी में नमी कम है। इसके बजाय, हम उन इलाकों में दाल और तिलहन जैसी फसलें उगाना चाहते हैं। ये लक्ष्य इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर तय किए गए हैं।’’

वर्ष 2026 के आखिर तक अल नीनो के ‘बहुत मजबूत’ होने के वैश्विक अनुमान के बारे में पूछे जाने पर, चौहान ने कहा कि सरकार मौजूदा हालात में उगाई जाने वाली फसलों और उनकी किस्मों पर राज्यों के साथ विस्तार से बातचीत कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि अभी बारिश में लगभग 12 प्रतिशत की कमी है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा संकट नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि मुश्किलें कुछ खास इलाकों तक ही सीमित हैं।

खाद के बारे में चौहान ने कहा कि कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव के बावजूद – कुछ मामलों में तो कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘देश में खाद की कोई कमी नहीं है, और रबी मौसम के लिए पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध रहेगी।’’

राज्यों द्वारा 2026-27 के लिए बताई गई जरूरतों के आधार पर, खाद की कुल जरूरत का अनुमान 380 लाख टन लगाया गया है।

मौजूदा शुरुआती स्टॉक 163 लाख टन से ज्यादा है, जो पिछले साल रबी सत्र की शुरुआत में उपलब्ध 122 लाख टन से काफी ज्यादा है।

हाल ही में खत्म हुए खरीफ बुवाई मौसम पर मंत्री ने कहा कि अल नीनो की चिंताओं और देश के कुछ हिस्सों में सूखे और बाढ़ के बावजूद खरीफ अनाज के उत्पादन में कोई बड़ी गिरावट नहीं आएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने अप्रैल से ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी थी।

हालांकि, कुछ खरीफ फसलों के बुवाई क्षेत्र में कमी आई है, लेकिन कुल बुवाई क्षेत्र मोटे तौर पर पिछले साल के बराबर ही है। उन्होंने कहा कि अभी बारिश में लगभग 12 प्रतिशत की कमी है, जबकि आम तौर पर सूखे की स्थिति तब मानी जाती है जब संबंधित अवधि में कमी 20 प्रतिशत से ज्यादा हो।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि इस कमी से उत्पादन पर कोई खास असर पड़ेगा।’’ उन्होंने यह भी कहा कि उत्पादन के अंतिम आंकड़े जल्द ही जारी किए जाएंगे।

खेती के रकबे में सबसे ज्यादा कमी धान की खेती में आई है। इसका रकबा लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर कम हो गया है। मक्का, सोयाबीन और कपास की खेती के रकबे में भी कमी आई है। उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर की खेती का रकबा बढ़ा है।

मंत्री ने कहा, ‘‘इससे पता चलता है कि किसान अब दाल और मोटे अनाज की खेती की ओर बढ़ रहे हैं।’’

महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में खेती के रकबे में कमी की सूचना मिली है। इन राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर में लगी फसलें प्रभावित हुई हैं और नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।

मंत्री ने यह भी कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, तेलंगाना और राजस्थान में सूखे की स्थिति को लेकर चिंता है।

एक केंद्रीय दल कर्नाटक का दौरा करने वाली है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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