पहली छमाही में स्मार्टफोन के दाम 16 प्रतिशत बढ़े : रिपोर्ट

पहली छमाही में स्मार्टफोन के दाम 16 प्रतिशत बढ़े : रिपोर्ट

पहली छमाही में स्मार्टफोन के दाम 16 प्रतिशत बढ़े : रिपोर्ट
Modified Date: September 29, 2026 / 07:57 pm IST
Published Date: September 29, 2026 7:57 pm IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) देश में स्मार्टफोन की कीमतें 2026 की पहली छमाही में औसतन 16 प्रतिशत बढ़ गईं। मेमोरी चिप की बढ़ती लागत और रुपये की कमजोरी से आयातित कलपुर्जे महंगे होने के कारण फोन के दाम बढ़े। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

बाजार शोध फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी से 10,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन सबसे अधिक प्रभावित हुए। इस खंड में कीमतें औसतन करीब 32 प्रतिशत बढ़ गईं और बिक्री 2026 की पहली छमाही में सालाना आधार पर 65 प्रतिशत घट गई।

इसके अलावा, 10,000-15,000 रुपये वाले खंड में भी स्मार्टफोन की बिक्री 20 प्रतिशत कम हुई। यह खंड आमतौर पर स्मार्टफोन बाजार के सबसे बड़े हिस्सों में से एक है।

हालांकि, 20,000 रुपये से अधिक कीमत वाले फोन की बिक्री इस दौरान बढ़ती रही। ऊंची शुरुआती कीमतों के बावजूद आकर्षक खरीद पेशकश और नो-कॉस्ट ईएमआई ने महंगे फोन खरीदना आसान बनाया।

शोध फर्म ने कहा कि मेमोरी की बढ़ती लागत के कारण अप्रैल-जून तिमाही में भारत में स्मार्टफोन का औसत बिक्री मूल्य रिकॉर्ड 318 डॉलर पर पहुंच गया।

काउंटरपॉइंट ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) डेटा सेंटर में डीआरएएम और एनएएनडी की मांग बढ़ने से मेमोरी की आपूर्ति पर दबाव पड़ा। वहीं, रुपये की कमजोरी से आयातित फोन कलपुर्जों की लागत भी बढ़ गई।

भारत में बिकने वाले करीब 99 प्रतिशत मोबाइल फोन का निर्माण स्थानीय स्तर पर होता है। इसके बावजूद अधिकांश फोन कंपनियों ने लागत बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा ग्राहकों पर डाल दिया।

काउंटरपॉइंट ने कहा कि पहली छमाही में वनप्लस ने तुलनात्मक रूप से कम कीमतें बढ़ाईं। कंपनी के स्मार्टफोन की कीमतों में इस दौरान औसतन आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरी तिमाही में इसकी बिक्री पांच प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जबकि समूचे स्मार्टफोन बाजार में दहाई अंक की गिरावट की आशंका है।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के शोध निदेशक तरुण पाठक ने कहा कि लागत बढ़ने की स्थिति में कंपनियों के सामने आमतौर पर कीमत स्थिर रखकर मार्जिन घटाने या मार्जिन बचाने के लिए बिक्री की मात्रा गंवाने का विकल्प होता है।

शोध फर्म का अनुमान है कि मेमोरी की कीमतों में 2028 से पहले कमी आने की संभावना नहीं है। रुपये की कमजोरी से आयात लागत बढ़ने के कारण स्मार्टफोन की कीमतों पर दबाव आगे भी बना रह सकता है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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