नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) पश्चिम एशिया युद्ध के कारण निर्यात खेप की आवाजाही प्रभावित रहने के बीच देश के मधुमक्खीपालन करने वाले किसानों की अगुवा संस्था कनफेडरेशन ऑफ एपिकल्चर इंडस्ट्री (सीएआई) ने सरकार से मांग की है कि निर्यातक उद्योगों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से बैंक ऋण लौटाने की अवधि में जो विशेष छूट दी गई है, उसके दायरे में मधुमक्खीपालन उद्योग को भी लाया जाना चाहिये।
सीएआई के अध्यक्ष देवव्रत शर्मा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री एवं भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व (पत्र) भेजा गया है।
सीएआई ने भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वैश्विक व्यापार व्यवधानों, विशेषकर पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित निर्यातकों को राहत प्रदान करने को उठाए गए कदमों की सराहना की है। इन उपायों में निर्यात प्राप्तियों की अवधि को नौ माह से बढ़ाकर 15 माह किया गया है। साथ खेप भेजने से पहले और खेप भेजने के बाद के ऋण लौटाने की अवधि को 450 दिन तक बढ़ाया गया है। यह समयसीमा पहले क्र्मश: 90-90 दिन ही थी।
इसके अलावा प्रभावित निर्यातकों के लिए ऋण किस्तों एवं ब्याज पर छूट तथा बैंकों को ऋण सीमा एवं मार्जिन में लचीलापन देने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।
सीएआई के अध्यक्ष ने कहा कि मधुमक्खी पालन एवं कृषि निर्यात क्षेत्र, जो वर्तमान परिस्थितियों में अत्यधिक प्रभावित हुए हैं, उन्हें अभी तक इन राहत उपायों के दायरे में शामिल नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन (शहद निर्यात) एवं कृषि निर्यात क्षेत्र को हाल ही में घोषित निर्यात राहत उपायों के दायरे में शामिल किया जाना चाहिये। उन्होंने स्पष्ट किया कि जारी पश्चिम एशिया संकट के कारण पारंपरिक निर्यात मार्ग बाधित हुए हैं, लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि हुई है, निर्यात खेप भेजने में देरी हो रही है तथा भुगतान चक्र प्रभावित हुआ है। इसके अतिरिक्त, पूर्व में अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क संबंधी चुनौतियों ने भी इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर किया है।
शर्मा ने कहा कि मौजूदा स्थिति में शहद निर्यात क्षेत्र – निर्यात भुगतान प्राप्ति में अत्यधिक देरी, कार्यशील पूंजी पर बढ़ते दबाव, विदेशी खरीदारों द्वारा ऑर्डर रद्द या स्थगित करने, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में गिरावट, मधुमक्खी पालकों, किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं एवं एमएसएमई इकाइयां गंभीर नकदी संकट जैसी प्रमुख चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
सीएआई ने यह भी रेखांकित किया कि भारत के लगभग 80 प्रतिशत शहद का निर्यात अमेरिका को तथा 20 प्रतिशत पश्चिमी एशियाई देशों को होते हैं। इस उच्च अंतरराष्ट्रीय निर्भरता के कारण वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों का देश के शहद एवं मधुमक्खीपालन से संबंधित उत्पादों पर व्यापक और श्रृंखलाबद्ध प्रभाव पड़ा है, जिससे हजारों छोटे एवं सीमांत मधुमक्खी पालकों और किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए सीएआई अध्यक्ष शर्मा ने आग्रह किया है कि मधुमक्खी पालन एवं कृषि निर्यात क्षेत्र को भी वर्तमान निर्यात राहत पैकेज में शामिल किया जाए। इससे न केवल इस क्षेत्र को स्थिरता मिलेगी, बल्कि इससे जुड़े लाखों लोगों की आजीविका भी सुरक्षित हो सकेगी।
सीएआई ने सरकार एवं संबंधित प्राधिकरणों से इस महत्वपूर्ण विषय पर शीघ्र हस्तक्षेप एवं सकारात्मक निर्णय का आग्रह किया है।
भाषा राजेश अजय
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