होशियारपुर, छह जून (भाषा) पंजाब के होशियारपुर जिले में 100 वर्ष से अधिक पुरानी एक सहकारी समिति ग्रामीण विकास और सामुदायिक सहयोग की मिसाल बनकर उभरी है। यह समिति किसानों को कृषि, वित्तीय एवं बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादकता और जीवन स्तर सुधारने में अहम भूमिका निभा रही है।
लंबरा कांगड़ी बहुउद्देश्यीय सहकारी सेवा समिति की स्थापना जुलाई 1920 में 11 सदस्यों के साथ हुई थी। समय के साथ यह एक बहुद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समिति (एम-पैक्स) में बदल गई और अब यह चार गांवों लंबरा, बेरों कांगड़ी, दुडियाना कलां और बग्गेवाल के करीब 3,700 लोगों को सेवाएं दे रही है।
समिति के सचिव-सह-परियोजना प्रबंधक जसविंदर सिंह सैनी ने कहा कि इसके लगभग 1,922 सक्रिय सदस्य हैं और कुल जमा राशि करीब 31 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। समिति ने अब तक लगभग पांच करोड़ रुपये के ऋण कृषि, शिक्षा, आवास, वाहन और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों के लिए दिए हैं।
दैनिक आधार पर लगभग 2,900 लोग समिति की सेवाओं का लाभ लेते हैं। किसानों के लिए यहां कृषि उपकरण किराए पर उपलब्ध कराए जाते हैं और फसलों के प्रसंस्करण के लिए एक कृषि-प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित किया गया है।
समिति के पास 90 से अधिक कृषि उपकरण हैं, जिनमें ट्रैक्टर, हार्वेस्टर एवं रोपाई मशीन के साथ ड्रोन भी शामिल हैं। ड्रोन के जरिए उर्वरकों और कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे लागत में कमी और समय की बचत हो रही है।
समिति ने लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से कृषि-प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित किया है जहां आटा, तेल, चावल और मसालों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण किया जाता है। इससे किसानों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।
पर्यावरणीय पहल के तहत एक बायोगैस संयंत्र भी संचालित किया जा रहा है, जिससे सस्ते ईंधन की आपूर्ति हो रही है। इसके अलावा, प्रतिदिन करीब चार लाख लीटर दूषित जल का उपचार करने वाला संयंत्र भी स्थापित किया गया है।
सहकारी समिति ने ग्रामीणों के लिए जन सेवा केंद्र, जन औषधि केंद्र, एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य शिविर जैसी सुविधाएं भी शुरू की हैं। साथ ही, संचालन को डिजिटल बनाकर पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाई गई है।
भविष्य में यह सहकारी समिति अनाज भंडारण, सौर ऊर्जा, बायो-सीएनजी और पराली प्रबंधन की परियोजनाओं पर काम करने की योजना बना रही है।
इस समिति को ग्रामीण विकास एवं नवाचार के लिए नाबार्ड और एनसीडीसी सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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