गैस संकट की वजह से प्रभावित यूरिया उत्पादकों को वित्तीय राहत प्रदान करे सरकार : एफएआई

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गैस संकट की वजह से प्रभावित यूरिया उत्पादकों को वित्तीय राहत प्रदान करे सरकार : एफएआई

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  • Publish Date - March 23, 2026 / 06:15 PM IST,
    Updated On - March 23, 2026 / 06:15 PM IST

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) भारतीय उर्वरक संघ (एफएआई) ने सरकार से गैस आपूर्ति में व्यवधान से प्रभावित यूरिया उत्पादकों को वित्तीय राहत प्रदान करने का आग्रह किया है। एफएआई ने चेतावनी दी है कि उत्पादन में कमी और पैकेजिंग सामग्री की अलग से कमी के कारण महत्वपूर्ण खरीफ सत्र से पहले उर्वरक आपूर्ति बाधित हो सकती है।

सरकार को लिखे पत्र में, एफएआई ने मौजूदा भू-राजनीतिक संकट से उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों का हवाला देते हुए सीमित गैस आपूर्ति के तहत संचालित संयंत्रों के लिए ऊर्जा लागत प्रतिपूर्ति और जुर्माने में छूट की मांग की है। नौ मार्च, 2026 को अधिसूचित प्राकृतिक गैस आपूर्ति विनियमन आदेश में उर्वरक संयंत्रों को प्राथमिकता क्षेत्र-2 के तहत वर्गीकृत किया गया है, जिसके तहत उन्हें छह महीने की औसत खपत का 70 प्रतिशत आवंटित किया गया है।

एफएआई ने कहा कि यह प्रतिबंध नई यूरिया नीति 2025, संशोधित एनपीएस -तीन और एनआईपी 2012 के तहत संचालित संयंत्रों में उत्पादन को प्रभावित कर रहा है।

उद्योग संगठन ने सरकार से व्यवधान की अवधि के दौरान वास्तविक ऊर्जा खपत या लागू ऊर्जा मानदंडों – जो भी अधिक हो – को मान्यता देने का अनुरोध किया।

इसने गैस आपूर्तिकर्ताओं द्वारा लगाए गए किसी भी असंतुलित जुर्माने से छूट या प्रतिपूर्ति (वापसी) के साथ-साथ संकट के दौरान बिल किए गए गैस की मात्रा और कीमतों की पूर्ण प्रतिपूर्ति का भी अनुरोध किया।

एफएआई ने अलग से पैकेजिंग सामग्री में उभरते संकट की ओर ध्यान दिलाया और चेतावनी दी कि कुछ घरेलू पॉलीप्रोपाइलीन और उच्च घनत्व पॉलीइथिलीन ग्रेन्यूल आपूर्तिकर्ताओं ने उत्पादन कम कर दिया है, जिससे उर्वरक संयंत्रों और बंदरगाहों पर पैकेजिंग आपूर्ति श्रृंखला खतरे में पड़ गई है।

एफएआई ने कहा, ‘‘कम उपलब्धता के कारण महत्वपूर्ण स्टॉक संचय के मौसम में उर्वरकों की सुचारू आपूर्ति के सभी प्रयास विफल होने की संभावना है।’’ उर्वरक संघ ने ग्रेन्यूल आपूर्तिकर्ताओं से आपूर्ति की मात्रा को बनाए रखने का आग्रह किया।

खरीफ की बुवाई का मौसम आमतौर पर जून में शुरू होता है, जब देश के सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले उर्वरक यूरिया की मांग चरम पर होती है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय