नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) सरकार छोटे और मझोले उद्यमों को समर्थन देने के लिए गुणवत्ता प्रमाणन शुल्क में दी जाने वाली छूट की समयसीमा को मौजूदा मध्य 2026 से तीन साल आगे बढ़ाने जा रही है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि भारत विनिर्माण में गुणवत्ता को प्राथमिकता देने के नजरिये को बढ़ावा दे रहा है।
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने इस विस्तार के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत सूक्ष्म इकाइयों को शुल्क में 80 प्रतिशत, छोटे उद्यमों को 50 प्रतिशत और मध्यम आकार की कंपनियों को 20 प्रतिशत की छूट दी जाती है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव भरत खेड़ा ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में कहा, ”हाल में हमने एक प्रस्ताव पेश किया है और इसे जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है…। यह रियायत अगले तीन वर्षों के लिए उपलब्ध होगी।”
खेड़ा ने कहा कि देश को अपने ‘विकसित भारत’ के विनिर्माण दृष्टिकोण को हकीकत में बदलने के लिए केवल अनुपालन पर जोर देने के बजाए गुणवत्ता को संस्कृति का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ अनुपालन के लिए गुणवत्ता पर जोर नहीं देना चाहिए, बल्कि समझना चाहिए कि यह बाजार तक पहुंच को आसान बनाने का जरिया है।
भाषा पाण्डेय रमण
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