नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए उद्योग जगत के साथ मिलकर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य से विभिन्न उद्योग संगठनों के साथ एक अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की गई। बैठक में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, गुणवत्ता मानकों को सुधारने और प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई।
गोयल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार प्रमुख मंत्रालयों के अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ मिलकर घरेलू उत्पादन बढ़ाने की रणनीति तैयार कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार करीब 100 ऐसे उत्पादों की पहचान कर रही है, जिनका या तो भारत में उत्पादन नहीं होता या बहुत सीमित स्तर पर होता है। इनमें वाहन, रसायन, प्लास्टिक और पेट्रोरसायन क्षेत्र के उत्पाद शामिल हैं। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर होने वाले विदेशी मुद्रा व्यय को कम करना है।
गोयल ने कहा कि देश का आयात 2025-26 में बढ़कर 775 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2023-24 में यह 721.2 अरब डॉलर था। भारत मुख्य रूप से कच्चा तेल, सोना, चांदी, मशीनरी, उर्वरक, खाद्य तेल, रसायन, प्लास्टिक सामग्री, धातु, परिवहन उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का आयात करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कुछ क्षेत्रों, खासकर प्लास्टिक उद्योग में लागत बढ़ी है।
इसी बीच, औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि मार्च में घटकर 4.1 प्रतिशत रह गई, जो पिछले पांच महीनों में सबसे कम है। इसका कारण विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती और ऊर्जा क्षेत्र में लगभग स्थिर वृद्धि है।
गोयल ने बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ भी एक बैठक की, जिसमें निर्यातकों, आयातकों और बंदरगाह प्राधिकरणों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
उन्होंने एक अलग पोस्ट में कहा, “हम इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि चिंताओं के समाधान के लिए समन्वित और समयबद्ध कदम उठाए जाएं तथा भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नए अवसर पैदा किए जाएं।”
भाषा योगेश रमण
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