(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कॉरपोरेट जगत से अपने सीएसआर खर्च को कुपोषण से निपटने में लगाने का मंगलवार को आह्वान किया और इसे भारत के भविष्य एवं उनके अपने व्यावसायिक हितों के लिए महत्वपूर्ण करार दिया।
एनडीडीबी फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘पोषण सुरक्षा एवं कुपोषण निवारण में कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी की भूमिका’ विषय पर राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन में गोयल ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए देश को कुपोषण-मुक्त बनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, ‘‘ देश को कुपोषण से मुक्त करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है। गर्भावस्था और शिशु के विकास के चरण में ही कुपोषण को रोका जा सकता है।’’
मंत्री ने इस क्षेत्र में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यों की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए यह बात कही।
गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि कुपोषण की रोकथाम पर केंद्रित सीएसआर गतिविधियों से निवेश पर बेहतर प्रतिफल प्राप्त होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह दान नहीं है, आप अपनी कंपनी के भविष्य के मुनाफे में निवेश कर रहे हैं। अगर आप अपनी गतिविधियों को कुपोषण से जोड़ते हैं तो आप अपना ही भला कर रहे हैं। कॉरपोरेट कंपनियां खुद की मदद कर रही हैं, नए बाजार, नया श्रम, नए कर्मचारी एवं भविष्य के नए उपभोक्ता तैयार कर रही हैं।’’
गोयल ने कंपनियों से आग्रह किया कि वे दो प्रतिशत सीएसआर खर्च के अनिवार्य नियम को बाध्यकारी दायित्व के रूप में नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देखें।
उन्होंने कॉरपोरेट जगत से शहरों से बाहर निकलकर दूरदराज के क्षेत्रों तक अपनी गतिविधियों का विस्तार करने का भी आह्वान किया।
इस कार्यक्रम में दो सीएसआर कार्यक्रम एसएआईएल-भिलाई स्टील प्लांट के ‘गिफ्टमिल्क कार्यक्रम’ और आईडीबीआई बैंक के ‘शिशु संजीवनी कार्यक्रम’ की शुरुआत की गई।
‘गिफ्टमिल्क कार्यक्रम’ के तहत, छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील संयंत्र के खनन क्षेत्रों में स्थित सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 4,000 बच्चों को विटामिन ए और डी से युक्त सुगंधित दूध मिलेगा, जिसकी आपूर्ति एनडीडीबी द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ मिल्क फेडरेशन के माध्यम से की जाएगी।
‘शिशु संजीवनी कार्यक्रम’ महाराष्ट्र के नागपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित आंगनवाड़ी केंद्रों में करीब 3,000 बच्चों को पोषण संबंधी सहायता प्रदान की जाएगी।
मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध मंत्री राजीव रंजन सिंह ने इन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि शिशु अवस्था एवं गर्भावस्था के दौरान संतुलित पोषण ही कुपोषण से निपटने का एकमात्र समाधान है।
उन्होंने बताया कि दूध और दुग्ध उत्पाद 25-35 प्रतिशत प्रोटीन की पूर्ति सुनिश्चित कर सकते हैं, जो बच्चे के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, कृष्ण पाल गुर्जर, एस. पी. सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन के अलावा सहकारिता सचिव आशीष कुमार भूटानी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
भाषा निहारिका रमण
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