नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का कुल संग्रह जून में 14 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये हो गया। आयात और घरेलू आपूर्ति से कर संग्रह में वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
आंकड़ों के अनुसार, घरेलू लेन-देन से सकल संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी), राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) क्रमशः 37,376 करोड़ रुपये, 45,116 करोड़ रुपये और 52,282 करोड़ रुपये शामिल हैं।
आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व जून में 34.6 प्रतिशत बढ़कर 60,038 करोड़ रुपये हो गया।
आंकड़ों के अनुसार, कुल ‘रिफंड’ जून में 29.1 प्रतिशत बढ़कर 32,436 करोड़ रुपये रहा।
‘रिफंड’ समायोजित करने के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह जून में 11.2 प्रतिशत बढ़कर 1.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।
एकेएम ग्लोबल में अप्रत्यक्ष कर विभाग के प्रमुख इकेश नागपाल ने बताया कि मई, 2026 की तुलना में संग्रह लगभग स्थिर रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि जीएसटी राजस्व अब एक बार के उछाल के बजाय लगातार उच्च स्तर पर स्थिर हो रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘ सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि आयात से राजस्व में 34.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो घरेलू संग्रह की 6.5 प्रतिशत वृद्धि से काफी अधिक है। यह वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद आयात गतिविधियों के जारी रहने को दर्शाता है।’’
जीएसटी एक जुलाई, 2017 को लागू हुआ था। इसके जरिये 17 केंद्रीय एवं राज्य करों तथा 13 उपकरों को समाप्त कर एक एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली स्थापित की गई थी। इस महीने जीएसटी को लागू हुए नौ वर्ष पूरे हो गए।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल जीएसटी संग्रह 8.4 प्रतिशत बढ़कर लगभग 6.32 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें घरेलू लेन-देन से 2.8 प्रतिशत और आयात से 26.2 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
पेशेवर सेवा कंपनी डेलॉयट इंडिया के साझेदार एम.एस. मणि ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों के बावजूद जीएसटी संग्रह का दो लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचना देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।
ईवाई इंडिया के कर साझेदार सौरभ अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी ‘रिफंड’ में वृद्धि सरकार की कार्यशील पूंजी को मुक्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भाषा निहारिका अजय
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