पान मसाला पर जीएसटी के साथ उपकर भी लगने से कर चोरी रोकने में मदद मिलेगीः सूत्र

पान मसाला पर जीएसटी के साथ उपकर भी लगने से कर चोरी रोकने में मदद मिलेगीः सूत्र

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  • Publish Date - January 1, 2026 / 05:10 PM IST,
    Updated On - January 1, 2026 / 05:10 PM IST

नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) पान मसाला विनिर्माण पर जीएसटी के साथ मशीन एवं क्षमता पर आधारित उपकर लगने से एक व्यापक कर ढांचा तैयार होगा जिससे कर चोरी की पहचान बेहतर होने के साथ राजस्व की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।

वित्त मंत्रालय ने एक फरवरी से पान मसाला उत्पादन पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लगाने की अधिसूचना जारी की है। यह उपकर पहले से लागू उच्चतम 40 प्रतिशत जीएसटी दर के अतिरिक्त होगा। इसके बावजूद कुल कर भार मौजूदा स्तर 88 प्रतिशत पर ही रहेगा।

फिलहाल पान मसाला पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है। लेकिन एक फरवरी से व्यवस्था में बदलाव करते हुए जीएसटी को पान मसाला के खुदरा बिक्री मूल्य (आरएसपी) के आधार पर लगाया जाएगा जबकि उपकर को विनिर्माता की स्थापित उत्पादन क्षमता के आधार पर वसूला जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी और उपकर के जरिये मूल्य और क्षमता से जुड़े दो अलग-अलग डेटा समूह उपलब्ध होंगे। इन दोनों डेटा समूह का मिलान पान मसाला और धुआंरहित तंबाकू जैसे उन क्षेत्रों में कर चोरी की गुंजाइश को काफी हद तक कम करेगा, जहां ऐतिहासिक रूप से समुचित सूचना न देने, मूल्यांकन विवाद और अघोषित उत्पादन की समस्या रही है।

सूत्र ने कहा, ‘आरएसपी पर आधारित जीएसटी से पता चलेगा कि कितने माल को किस कीमत पर बेचा गया जबकि उपकर डेटा बताएगा कि मशीनों की क्षमता के आधार पर कितना उत्पादन संभव था। इन दोनों आंकड़ों का विश्लेषण सीसीटीवी फुटेज, औचक निरीक्षण, चार्टर्ड इंजीनियर द्वारा प्रमाणित मशीन मानकों और जोखिम-आधारित विश्लेषण के साथ करने पर कर वसूली में कमी की आशंका बहुत कम हो जाएगी।’

सूत्रों ने कहा कि यदि मशीनों की उत्पादन क्षमता के मुकाबले जीएसटी रिटर्न में घोषित बिक्री काफी कम पाई जाती है, तो यह तुरंत जोखिम का संकेत दिखाएगा। इससे समुचित सूचना न देने, फर्जी बिल पेश करने और अघोषित उत्पादन जैसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण