एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दिया, प्रबंधन फैसले से ‘हैरान’

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एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दिया, प्रबंधन फैसले से ‘हैरान’

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  • Publish Date - March 19, 2026 / 09:53 PM IST,
    Updated On - March 19, 2026 / 09:53 PM IST

नयी दिल्ली/मुंबई, 19 मार्च (भाषा) एचडीएफसी बैंक के गैर-कार्यकारी चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने ‘मूल्यों और नैतिकता’ पर मतभेदों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा दे दिया है। देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक के प्रबंधन ने इस्तीफे के कारण को ‘हैरान’ करने वाला बताया है।

प्रबंधन का कहना है कि बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद चक्रवर्ती ने चीजों को साफ-साफ नहीं बताया।

चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद एचडीएफसी बैंक समूह के अनुभवी अधिकारी केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि चक्रवर्ती और कार्यकारी नेतृत्व के बीच ‘संबंधों में कुछ समस्याएं’ हो सकती हैं, लेकिन उन्हें इस्तीफे के पीछे कोई ठोस कारण नहीं मिला।

मिस्त्री ने कहा कि बैंक का परिचालन और संचालन स्थिर और मजबूत बना हुआ है।

यह पहली बार है कि एचडीएफसी बैंक के अंशकालिक चेयरमैन ने बैंक के कामकाज पर चिंता जताते हुए कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा दिया है।

उन्होंने 17 मार्च को लिखे अपने इस्तीफे में कहा, ‘‘पिछले दो वर्षों में मैंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी चीजें और गतिविधियां देखी हैं जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। यही मेरे उपरोक्त निर्णय का आधार है।’’

संचालन, नामांकन और पारिश्रमिक समिति के चेयरमैन एच. के. भनवाला को लिखे पत्र में चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘उपरोक्त कारणों के अलावा मेरे इस्तीफे का कोई अन्य महत्वपूर्ण कारण नहीं है।’’

एचडीएफसी बैंक ने बुधवार देर शाम शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि चक्रवर्ती ने 18 मार्च, 2026 को तत्काल प्रभाव से अंशकालिक चेयरमैन एवं स्वतंत्र निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है।

गौरतलब है कि चक्रवर्ती को आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव के पद से सेवानिवृत्ति के लगभग एक वर्ष बाद, पांच मई, 2021 से बैंक का अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया गया था।

उनका कार्यकाल 2024 में तीन वर्ष के लिए बढ़ाकर चार मई, 2027 तक कर दिया गया था।

गुजरात कैडर के 1985 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी चक्रवर्ती अप्रैल, 2020 में आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इससे पहले वह निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव थे। ये दोनों विभाग वित्त मंत्रालय के अधीन आते हैं।

चक्रवर्ती देश की प्रमुख आवास वित्त और मूल कंपनी एचडीएफसी लि. का बैंक में विलय की प्रक्रिया के दौरान चेयरमैन बने।

एचडीएफसी लि. का एचडीएफसी बैंक में विलय एक जुलाई, 2023 से प्रभावी हुआ। इससे 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक के संयुक्त बही-खाते वाला एक विशाल वित्तीय संस्थान अस्तित्व में आया।

चक्रवर्ती के पद छोड़ने के बारे में आरबीआई ने कहा कि बैंक के आचरण या संचालन के संबंध में कोई महत्वपूर्ण चिंता का विषय नहीं है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बयान में कहा, ‘‘ एचडीएफसी बैंक एक घरेलू स्तर पर प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंक (डी-एसआईबी) है जिसके पास मजबूत वित्तीय स्थिति, पेशेवर तरीके से संचालित निदेशक मंडल और सक्षम प्रबंधन दल है। हमारे समय-समय पर किए गए आकलन के आधार पर, इसके आचरण या संचालन के संबंध में चिंता वाली कोई बात नहीं है।’’

बयान में कहा गया कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और उसकी वित्तीय स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।

बैंक के चेयरमैन के इस्तीफे के बाद बृहस्पतिवार को एचडीएफसी बैंक के शेयरों में पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। बीएसई में यह 5.13 प्रतिशत टूटकर 799.70 रुपये पर बंद हुआ।

वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘‘बैंक ‘मजबूत बुनियाद के साथ सुदृढ़ संस्थान है।’’

वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने कहा कि आरबीआई इस संबंध में पहले ही एक बयान जारी कर चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘एचडीएफसी बैंक मजबूत बुनियाद के साथ एक सुदृढ़ संस्थान है।’’

इस अप्रत्याशित कदम के बाद एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शशिधर जगदीशन ने संवाददाताओं से कहा कि बोर्ड के अधिकांश सदस्यों ने चक्रवर्ती के इस कदम को ‘हैरान’ करने वाला बताया क्योंकि उन्होंने इस्तीफे पत्र में जिन चिंताओं का जिक्र किया है, उनका कोई विशेष उल्लेख नहीं किया था।

जगदीशन के अनुसार, बैंक में समस्या वाली कोई बात नहीं है और प्रबंधन ने विश्वास जताया कि समय के साथ बैंक अपनी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई कर लेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘बोर्ड के हर सदस्य ने चक्रवर्ती को अपना इस्तीफा वापस लेने या चिंताओं को विस्तार से समझाने की कोशिश की ताकि उनका समाधान किया जा सके, लेकिन वह नहीं माने।

उन्होंने कहा कि 17 मार्च (मंगलवार) के इस्तीफे पर बुधवार को बोर्ड की नामांकन और पारिश्रमिक समिति की बैठक में चर्चा हुई और शाम करीब सात बजे, दो पूर्णकालिक सदस्यों और दो स्वतंत्र निदेशकों सहित निदेशक मंडल के चार सदस्यों ने आरबीआई से घटनाक्रम के बारे में बातचीत शुरू की।

जगदीशन ने कहा कि पत्र में इस्तेमाल की गई भाषा को कुछ हद तक बदलने की कोशिश भी की गई थी। उन्होंने संकेत दिया कि इसमें सफलता न मिलने के कारण आरबीआई को जानकारी दी गई और नियामक ने तत्परता दिखाते हुए केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी दी।

प्रबंधन और चक्रवर्ती के बीच मतभेदों को लेकर व्यापक अटकलों के बीच, मिस्त्री ने ‘व्यक्तिगत संबंधों के मुद्दे’ का संकेत दिया, लेकिन संवाददाताओं से इस विषय में न पड़ने का अनुरोध किया।

एचडीएफसी बैंक के मूल कंपनी एचडीएफसी में विलय से जुड़ी चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर, इसके उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा ने कहा कि विलय से आवास ऋण लेने वालों के बचत खातों में वृद्धि के रूप में लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि इन खातों में औसत शेष राशि बैंक के औसत से 2.5 गुना अधिक है।

एचडीएफसी बैंक नेतृत्व संबंधी समस्याओं से जूझने वाला नवीनतम निजी क्षेत्र का बैंक है। पूर्व में आईसीआईसीआई बैंक की तत्कालीन सीईओ चंदा कोचर पर धोखाधड़ी वाली ऋण गतिविधियों शामिल होने का आरोप लगा था, जबकि एक्सिस बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी शिखा शर्मा का कार्यकाल बढ़ते फंसे ऋणों पर नियामकीय चिंताओं के कारण छोटा कर दिया गया था।

भाषा रमण अजय

अजय