कोलकाता, दो फरवरी (भाषा) बंधन बैंक के संस्थापक और समूह चेयरमैन चंद्र शेखर घोष ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय बजट में विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव, वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को सुरक्षित रखते हुए, बैंकिंग क्षेत्र को भारत के विकास के अगले चरण के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बजट में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करने और वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को सुरक्षित रखते हुए, इसे भारत के विकास के अगले चरण के साथ जोड़ने के लिए समिति के गठन का प्रस्ताव दिया।
उन्होंने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के लिए ऋण वितरण और प्रौद्योगिकी अपनाने के स्पष्ट लक्ष्यों के साथ एक प्रस्ताव की रूपरेखा भी बताई, और पैमाने और दक्षता में सुधार के लिए पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के एनबीएफसी के पुनर्गठन का सुझाव दिया।
घोष ने कहा कि प्रस्तावित समिति बैंकों, विशेष रूप से सूक्ष्म ऋण और समावेशन-आधारित ऋण देने वाले बैंकों के लिए भविष्य के नियामक और नीतिगत ढांचे को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘अगर हम विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं, तो सूक्ष्म ऋण उद्योग को और अधिक योगदान देना होगा, खासकर सबचे निचले पायदान के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करने में यह योगदान जरूरी है।’’
घोष ने कहा कि प्रस्तावित बैंकिंग समिति की सिफारिशों का सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में काम करने वाले ऋणदाताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘उम्मीद है कि जब यह समीक्षा अंतिम रूप लेगी, तो यह सूक्ष्म वित्त संस्थानों और इस खंड को ऋण देने वालों की मदद कर सकती है। इससे बैंकों को भी अधिक लाभ मिलेगा।’’
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