हिमाचल प्रदेश सरकार ने चराई नीति 2026 को मंज़ूरी दी

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने चराई नीति 2026 को मंज़ूरी दी

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  • Publish Date - June 12, 2026 / 10:15 PM IST,
    Updated On - June 12, 2026 / 10:15 PM IST

शिमला, 12 जून (भाषा) राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश चराई नीति 2026 को मंजूरी दे दी है। इसका मकसद चराई से जुड़ी व्यवस्था में सुधार करना है ताकि पर्यावरण सुरक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण के साथ तालमेल बिठाया जा सके, चरवाहों की आजीविका बेहतर हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो।

शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया कि नई नीति राज्य को सख्त और पुराने प्रतिबंधों से दूर करेगी और एक गतिशील, विज्ञान-आधारित रुख को सामने लायेगी। यह नीति जिम्मेदार चराई को घास के मैदानों की उत्पादकता बनाए रखने, मिट्टी में कार्बन स्टॉक बढ़ाने और जैव विविधता को बचाने के एक साधन के तौर पर देखती है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, ‘चराई नीति 2026 ‘हरियाली भी, खुशहाली भी’ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह हमारी चराई की परंपराओं की रक्षा करती है और पशुधन पर निर्भर परिवारों का भविष्य सुरक्षित करती है।’

उन्होंने कहा कि यह नीति पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि के बीच संतुलन बनाती है, जिससे राज्य में ज्यादा समावेशी, टिकाऊ और मजबूत चराई अर्थव्यवस्था की नींव पड़ती है।

इस नीति के तहत, वन विभाग, पशुपालन विभाग के साथ मिलकर एक व्यापक डेटाबेस पोर्टल बनाएगा। इसमें चरवाहे अगले छह महीनों के भीतर अपने नाम, पते, पशुओं की संख्या, पारंपरिक रास्तों और पड़ाव की जगहों का पंजीकरण कराएंगे।

यह प्रणाली ‘उपयोगकर्ता आंकड़े’ को आसानी से जांच करने के लिए हर प्रोफाइल को आधार, हिम परिवार और केंद्रीय भारत पशुधन पोर्टल से जोड़कर जीवन के पुराने तरीके को आधुनिक शासन व्यवस्था से जोड़ता है।

बयान में कहा गया है कि यह नीति उन पीढ़ियों के चरवाहों को भी मान्यता देती है जो बिना औपचारिक परमिट के काम करते रहे हैं। अब ये लोग अपनी जानकारी रजिस्टर करा सकते हैं, जिससे स्थानीय चराई सलाहकार समितियां व्यवस्थित रूप से उनकी स्थिति का मूल्यांकन कर सकेंगी और निष्पक्ष, तय कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर नए परमिट जारी कर सकेंगी।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण

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