वित्तीय क्षेत्र के स्वचालित होने के साथ मानवीय जवाबदेही मजबूत होनी चाहिए: डिप्टी गवर्नर मुर्मू

वित्तीय क्षेत्र के स्वचालित होने के साथ मानवीय जवाबदेही मजबूत होनी चाहिए: डिप्टी गवर्नर मुर्मू

वित्तीय क्षेत्र के स्वचालित होने के साथ मानवीय जवाबदेही मजबूत होनी चाहिए: डिप्टी गवर्नर मुर्मू
Modified Date: September 11, 2026 / 08:06 pm IST
Published Date: September 11, 2026 8:06 pm IST

मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि वित्तीय क्षेत्र में स्वचालन बढ़ने के साथ मानवीय जवाबदेही भी मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एल्गोरिदम के जरिये लिए जाने वाले वित्तीय फैसलों की जिम्मेदारी मशीनों पर नहीं डाली जा सकती।

मुर्मू ने यहां वैश्विक फिनटेक सम्मेलन में कहा, ‘‘जब कोई एल्गोरिदम किसी वित्तीय फैसले को लेता है या उस पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है, तो जवाबदेह कौन होगा? इसका जवाब एल्गोरिदम नहीं हो सकता। इसकी जिम्मेदारी विनियमित संस्था की होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जैसे-जैसे वित्तीय क्षेत्र अधिक स्वचालित होता जा रहा है, मानवीय जवाबदेही कम होने के बजाय और मजबूत होनी चाहिए।’’

डिजिटल ऋण के बारे में मुर्मू ने कहा कि प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल केवल मौजूदा ऋण व्यवस्था को तेज करने के बजाय बैंक कर्ज तक लोगों की पहुंच बढ़ाने के लिए होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘उद्देश्य केवल कर्ज को तेजी से उपलब्ध कराना नहीं हो सकता। ऋण को बेहतर बनाना भी जरूरी है।’’

मुर्मू ने ‘एजेंटिक एआई’ से जुड़े उभरते जोखिमों को भी रेखांकित किया। एजेंटिक एआई ऐसी प्रणालियों की ओर बढ़ रहा है, जो केवल विश्लेषण और सुझाव देने के बजाय सीमित मानवीय हस्तक्षेप के साथ योजना बनाने और कार्रवाई करने में सक्षम हैं।

मुर्मू ने कहा, ‘‘ये एजेंटिक एआई के खिलाफ तर्क नहीं हैं, बल्कि जिम्मेदार एजेंटिक एआई के पक्ष में तर्क हैं।’’

उन्होंने कहा कि आरबीआई की फ्री-एआई समिति एल्गोरिदम में पक्षपात, निर्णयों की व्याख्या किए जाने की क्षमता और डेटा गोपनीयता समेत कई मुद्दों पर काम कर रही है।

मुर्मू ने भुगतान प्रणालियों को क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े संभावित खतरों से निपटने की दिशा में आगे बढ़ने की भी जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि बैंकों, भुगतान संचालकों, वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को मिलकर काम करना होगा, क्योंकि क्वांटम खतरों से निपटने की क्षमता किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की क्षमता है।’’

उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान से जुड़ी धोखाधड़ी को तेजी से पूरे तंत्र से जुड़ी समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए। आरबीआई डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस मंच विकसित कर रहा है और संदिग्ध खातों की पहचान के लिए अपनी ‘म्यूलहंटर.एआई’ पहल का इस्तेमाल कर रहा है।

मुर्मू ने कहा कि भारत में डिजिटल वित्त के अगले चरण में गुणवत्ता, मजबूती और भरोसे पर ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि नियमन में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि समान जोखिम पैदा करने वाली समान गतिविधियों के लिए समान नियामकीय व्यवहार हो।

बैठक के दौरान अलग से बातचीत में उन्होंने कहा कि आरबीआई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से मिले उस प्रस्ताव पर प्राप्त सुझावों की समीक्षा कर रहा है, जिसके तहत एनबीएफसी को केवल पहले से निर्धारित पुनर्भुगतान अवधि वाले ऋण देने होंगे। इस व्यवस्था के तहत एक बार ऋण चुका दिए जाने के बाद स्वीकृत ऋण सीमा को दोबारा बहाल नहीं किया जा सकेगा।

भाषा योगेश रमण

रमण


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