मौद्रिक समीक्षा बैठक में वृद्धि, मुद्रास्फीति की स्थिति का नये सिरे से करेंगे आकलन: मल्होत्रा
मौद्रिक समीक्षा बैठक में वृद्धि, मुद्रास्फीति की स्थिति का नये सिरे से करेंगे आकलन: मल्होत्रा
नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) अगले महीने अपनी बैठक में वृद्धि और मुद्रास्फीति की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करेगी।
मल्होत्रा ने टीवी चैनल ‘सीएनबीसी-टीवी18’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का मुद्रास्फीति पर असर पड़ेगा, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बढ़ी हुई लागत का कितना बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं। भारत के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत जुलाई में 82 डॉलर प्रति बैरल थी जो अगस्त में बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल हो गई। इसका निश्चित रूप से कुछ असर होगा, लेकिन यह फिर से लागत के उपभोक्ताओं तक पहुंचने पर निर्भर करेगा।’’
मल्होत्रा ने कहा कि सरकार ने काफी हद तक इस झटके को अपने ऊपर लिया और उसका असर कम किया है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था इस स्थिति से अच्छी तरह निपटी है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई मुद्रास्फीति पर नजर रखेगा।
मल्होत्रा ने कहा, ‘‘जोखिम दोनों तरफ हैं… एमपीसी करीब एक महीने में जब बैठक करेगी, तब वृद्धि-मुद्रास्फीति की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करेगी। मैं अपना आकलन नहीं बताना चाहता।’’
एमपीसी की अगली बैठक पांच से सात अक्टूबर, 2026 को होनी है।
एफसीएनआर(बी) जमा के बारे में मल्होत्रा ने कहा कि हाल में समाप्त हुई आरबीआई की विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा के तहत 127.22 अरब डॉलर की एफसीएनआर(बी) जमा जुटाई गईं। इनमें करीब 50 प्रतिशत जमा पांच साल की अवधि वाली हैं।
उन्होंने कहा कि मजबूत प्रवाह दुनिया भर के निवेशकों के भारत के मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद में विश्वास को दर्शाता है और इससे कम समय में विदेशी पूंजी प्रवाह जुटाने की क्षमता भी प्रदर्शित होती है।
मल्होत्रा ने कहा कि इस प्रवाह से विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिर करने, वित्तीय स्थिरता और बाहरी क्षेत्र की मजबूती में मदद मिली है। इससे नकदी उपलब्ध हुई और बाजार धारणा में सुधार हुआ।
उन्होंने कहा कि एफसीएनआर(बी) जमा में पांच साल की अवधि वाली जमाओं की हिस्सेदारी करीब 48.50 से 50 प्रतिशत है। इसके बाद करीब 42 प्रतिशत हिस्सेदारी तीन से चार साल की अवधि वाली जमाओं की है, जबकि करीब नौ प्रतिशत जमा चार से पांच साल की अवधि वाली हैं।
मल्होत्रा ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में मौजूदा अतिरिक्त नकदी के प्रबंधन के लिए आरबीआई के पास पर्याप्त साधन हैं और जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जाएगा। कुछ नकदी समय के साथ स्वतः कम हो जाएगी।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

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