कोच्चि, 20 सितंबर (भाषा) चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का शीर्ष निकाय भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट) के जरिये तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के पास मौजूद भूमि परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण के तरीकों पर काम कर रहा है। इसके अलावा टीटीडी के पास मौजूद सोने की सही मात्रा तथा कीमत का पता लगाने के तरीकों पर भी काम किया जा रहा है।
आईसीएआई टीटीडी के लिए नई लेखांकन नियमावली भी तैयार कर रहा है। टीटीडी आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर मंदिर का प्रबंधन करता है और इसे दुनिया के सबसे समृद्ध हिंदू मंदिरों में गिना जाता है।
आईसीएआई के एक अधिकारी ने रविवार को कहा कि संस्थान टीटीडी के साथ कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इनमें नई लेखांकन नियमावली तैयार करना, जमीन से आय हासिल करने के लिए रीट की व्यवस्था और सोने की संपत्तियों का मूल्यांकन शामिल है।
रीट ऐसी व्यवस्था है जिसके जरिये जमीन या इमारत जैसी अचल संपत्तियों से नियमित आय हासिल की जा सकती है। टीटीडी के पास बड़ी मात्रा में जमीन है, जिसमें से काफी जमीन श्रद्धालुओं ने दान में दी है।
आईसीएआई के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी ने शनिवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा कि टीटीडी के लिए नई लेखांकन नियमावली तैयार करने का काम अंतिम चरण में है।
उन्होंने कहा कि टीटीडी के लिए तैयार की जा रही यह व्यवस्था देश के अन्य बड़े मंदिरों के लिए भी एक मॉडल के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है। इसमें मंदिर की आय-व्यय का हिसाब रखने का तरीका, लेखांकन मानकों का इस्तेमाल और लेखांकन से जुड़ी नीतियां शामिल होंगी।
उन्होंने कहा कि टीटीडी ने अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण और उनकी क्षमता बढ़ाने में भी आईसीएआई से मदद मांगी है।
आईसीएआई के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘चूंकि यह भारत का सबसे समृद्ध और सबसे बड़ा मंदिर है, इसलिए हमारी उम्मीद है कि टीटीडी के लिए तैयार की जाने वाली नियमावली को देश के दूसरे ऐसे न्यास और संगठन भी अपना सकेंगे।’’
उन्होंने कहा कि टीटीडी के लिए तैयार की जा रही व्यवस्था में मंदिर को मिलने वाले चढ़ावे और अन्य आय, किए जाने वाले भुगतान तथा उसकी कुल संपत्तियों और देनदारियों के हिसाब समेत सभी महत्वपूर्ण वित्तीय पहलुओं को शामिल किया जा रहा है।
भाषा योगेश अजय
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