कैसे पता करें कि एआई के जवाब पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं?

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कैसे पता करें कि एआई के जवाब पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं?

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  • Publish Date - September 20, 2026 / 02:15 PM IST,
    Updated On - September 20, 2026 / 02:15 PM IST

(लियो एस. लो, वर्जीनिया विश्वविद्यालय)

वर्जीनिया, 20 सितंबर (द कन्वरसेशन) हाल ही में मैंने गूगल पर एक सीधा-सा सवाल टाइप किया कि किशोरों के लिए कितना ‘स्क्रीन टाइम’ बहुत ज्यादा माना जाता है? कई वर्षों से गूगल ऐसे सवालों के जवाब में वेबसाइट्स के लिंक दिखाता आया है, लेकिन इस बार उसने सीधे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार किया हुआ जवाब दिया।

एआई ने एक संख्या बताई, लेकिन साथ ही जवाब को जटिल बनाते हुए यह भी समझाया कि स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय की अवधि से ज्यादा महत्वपूर्ण यह हो सकता है कि उस समय का इस्तेमाल किस तरह और किस संतुलन के साथ किया जा रहा है। उसने यह भी कहा कि ‘‘बहुत ज्यादा’’ स्क्रीन टाइम इस बात पर निर्भर कर सकता है कि किशोर की नींद, व्यायाम, पढ़ाई और मानसिक स्थिति कैसी है।

मैंने एक और सवाल पूछा : क्या मुझे रोजाना ‘एस्पिरिन’ लेनी चाहिए? इस बार एआई के जवाब में चिकित्सकीय जानकारी दी गई, संभावित जोखिमों के बारे में चेताया गया और मेरी उम्र तथा चिकित्सीय इतिहास बताने पर अधिक व्यक्तिगत सलाह देने की पेशकश की गई।

दोनों जवाब उपयोगी थे। लेकिन मेरे लिए ज्यादा दिलचस्प बात यह थी कि दोनों सवालों के जवाब देने का तरीका बिल्कुल अलग था।

एआई के जवाबों को लेकर अब तक की बहस मुख्य रूप से उनकी सटीकता पर केंद्रित रही है कि क्या एआई ने सही जवाब दिया? निश्चित रूप से यह महत्वपूर्ण सवाल है, लेकिन किसी एआई जवाब को परखने का यह सिर्फ एक पैमाना है। जवाब किस तरह का है, उसके आधार पर उपयोगकर्ता को भी अलग-अलग चीजों की जांच करनी पड़ती है।

मैं एआई के जवाबों को मोटे तौर पर चार प्रकारों में बांटना उपयोगी मानता हूं -तथ्यात्मक, व्याख्यात्मक, रचनात्मक और रणनीतिक। तथ्यात्मक दावे को आम तौर पर किसी विश्वसनीय स्रोत से जांचा जा सकता है। व्याख्या तथ्यात्मक रूप से सही होने के बावजूद इस बात पर निर्भर कर सकती है कि कौन-से साक्ष्यों को अधिक महत्व दिया गया और किन्हें नजरअंदाज किया गया। रचनात्मक जवाब तर्कपूर्ण हो सकता है, लेकिन फिर भी हो सकता है कि उस व्यक्ति के लिए उपयुक्त न हो, जिसके लिए उसे तैयार किया गया है। वहीं, बहुत अच्छी भाषा में लिखा गया रणनीतिक दस्तावेज भी जरूरी नहीं कि पूरी तरह सही हो।

समस्या यह है कि एआई इन चारों तरह के जवाब लगभग एक ही धाराप्रवाह और आत्मविश्वासपूर्ण अंदाज में देता है। इसलिए इनके बीच का फर्क आसानी से नजरों से छूट सकता है।

मैं वर्जीनिया विश्वविद्यालय में यूनिवर्सिटी लाइब्रेरियन और डीन ऑफ लाइब्रेरीज हूं। मैं पुस्तकालय पेशेवरों के लिए एआई से जुड़ी दक्षताएं विकसित करने के राष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व करता हूं और एआई साक्षरता के क्षेत्र में व्यापक स्तर पर परामर्श भी देता हूं। मैंने पहली बार एआई के जवाबों के इस वर्गीकरण का प्रस्ताव ‘जर्नल ऑफ एकेडमिक लाइब्रेरियनशिप’ में रखा था।

बेशक, ये चारों श्रेणियां एक-दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं हैं। एआई का एक जवाब एक साथ कई तरह का हो सकता है। फिर भी, इन चार प्रकार के जवाबों को समझना इस बात का आकलन करने में मदद करता है कि एआई के दिए जवाब को सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है या उसे और जांचने की जरूरत है।

गूगल आपको किस तरह का जवाब दे रहा है?

तथ्यात्मक जवाब ऐसा दावा करता है, जिसे उपलब्ध साक्ष्यों से जांचा जा सकता है। जैसे वर्जीनिया विश्वविद्यालय की स्थापना कब हुई या सोने का रासायनिक प्रतीक क्या है? ऐसे जवाबों को इस्तेमाल करने से पहले किसी विश्वसनीय स्रोत से उनकी पुष्टि करनी चाहिए। एआई अगर स्रोत का हवाला देता है, तो सीधे उस स्रोत को देखना बेहतर है।

व्याख्यात्मक जवाब साक्ष्यों पर आधारित होता है, लेकिन उसका कोई एक निश्चित निष्कर्ष नहीं होता। मसलन, किशोरों के लिए कितना स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा है या क्या घर से काम करने से उत्पादकता बढ़ती है। इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि एआई ने किन साक्ष्यों को महत्व दिया और किन्हें छोड़ दिया। स्क्रीन टाइम के मामले में गूगल ने शुरुआत में दो घंटे की सीमा बताई, लेकिन बाद में स्पष्ट किया कि विशेषज्ञ स्क्रीन के इस्तेमाल की गुणवत्ता और संदर्भ को अधिक महत्व देते हैं। ऐसे जवाबों को परखते समय पूछना चाहिए कि क्या इसी साक्ष्य की कोई दूसरी उचित व्याख्या भी हो सकती है।

रचनात्मक जवाब किसी तय सही उत्तर को खोजने के बजाय तैयार किए जाते हैं। कवर लेटर, शोक संदेश, पाठ योजना या किसी पैराग्राफ का नया मसौदा इसके उदाहरण हैं। इन्हें परखते समय देखना चाहिए कि वे उद्देश्य, पाठक और व्यक्ति की भाषा-शैली के अनुरूप हैं या नहीं।

रणनीतिक जवाब इस सवाल का उत्तर देते हैं कि आखिर करना क्या चाहिए, जैसे रोजाना एस्पिरिन लेनी चाहिए या घर खरीदना चाहिए। इनमें जानकारी के साथ व्यक्ति के लक्ष्य, जोखिम, फायदे-नुकसान और व्यक्तिगत परिस्थितियां भी शामिल होती हैं। ऐसे जवाबों में यह देखना जरूरी है कि एआई को आपकी परिस्थिति के अनुसार सलाह देने के लिए और कौन-सी जानकारी चाहिए और क्या किसी विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी है।

अंततः एआई के किसी जवाब को सही या गलत मानने से पहले यह पूछना अधिक उपयोगी है कि ‘‘यह किस तरह का जवाब है?’’ जवाब का प्रकार ही तय करता है कि उसके बाद हमें क्या करना चाहिए।

एआई के जवाब के बाद पहला सवाल :

मेरे सवाल आम गूगल सर्च से शुरू हुए थे। मैंने कोई चैटबॉट नहीं खोला था। एआई से तैयार जवाब अपने आप सामने आ गए और उनके नीचे वेबसाइट्स के लिंक भी दिए गए थे।

ये जवाब उपयोगी थे। गूगल ने जवाबों में संदर्भ जोड़ा, जटिलताओं को स्वीकार किया और अतिरिक्त जानकारी देने पर अधिक व्यक्तिगत मार्गदर्शन की पेशकश की। लेकिन एक ही जवाब के भीतर जवाब का स्वरूप बदल सकता है। किसी मेडिकल परामर्श में क्या कहा गया है, यह बताना एक बात है और यह तय करना दूसरी कि वह परामर्श किसी खास व्यक्ति पर कैसे लागू होता है।

एक उपयोगकर्ता के तौर पर हमें यह पहचानने की कोशिश करनी चाहिए कि हमारे सामने आए एआई जवाब में वास्तव में किस तरह का बौद्धिक काम किया गया है। यह देखना चाहिए कि उसकी व्याख्या कितनी ठोस है और दी गई सलाह हमारी परिस्थितियों पर वास्तव में लागू होती भी है या नहीं।

इसलिए एआई के किसी जवाब को सही या गलत मानने से पहले एक और बुनियादी सवाल पूछना उपयोगी होगा कि ‘‘यह किस तरह का जवाब है?’’ जवाब का प्रकार ही यह तय करने में मदद करेगा कि इसके बाद हमें क्या करना चाहिए।

द कन्वरसेशन गोला रंजन

रंजन