नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ (पीएमजेडीवाई) के 12 साल पूरे होने पर कहा कि इस योजना का अभूतपूर्व प्रभाव रहा है और इसके परिवर्तनकारी परिणाम देखने को मिले हैं।
मोदी सरकार के शुरुआती कार्यक्रमों में से एक के रूप में 28 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत हुई थी। सरकार के मुताबिक, इस योजना ने देश में वित्तीय परिदृश्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और यह दुनियाभर में वित्तीय समावेश की मिसाल बनी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी सहभागिता मंच ‘माईगव इंडिया’ की एक पोस्ट साझा करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘अभूतपूर्व स्तर और परिवर्तनकारी परिणाम! जनधन योजना का प्रभाव बेजोड़ रहा है।’’
‘माईगव इंडिया’ ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में कहा कि एक समय औपचारिक बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच इस बात पर निर्भर करती थी कि कोई व्यक्ति कहां रहता है, उसकी वित्तीय स्थिति कैसी है या बैंक से उसकी दूरी कितनी है। लेकिन आज देश के बैंकिंग परिदृश्य में बदलाव आया है।
इसने कहा कि करोड़ों जनधन खातों, ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक पहुंच, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और अंतिम छोर तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच ने वित्तीय समावेश को मजबूत किया है।
माईगव इंडिया के मुताबिक, वर्ष 2015 में 14.7 करोड़ जनधन खाते थे जिनकी संख्या 2026 में बढ़कर 59 करोड़ हो गई है। इससे लाखों लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने और अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ाने में मदद मिली है।
जनधन योजना के तहत बिना बैंक खाते वाले प्रत्येक वयस्क को किसी तरह की न्यूनतम शेष राशि और रखरखाव शुल्क के बगैर बुनियादी बैंक खाता उपलब्ध कराया जाता है। प्रत्येक खाते के साथ मुफ्त ‘रुपे डेबिट कार्ड’ भी दिया जाता है, जिसमें दो लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलता है।
खाताधारकों को 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी मिलती है, जो आपात स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
माईगव इंडिया ने कहा कि करीब 33 करोड़ महिलाओं के पास जनधन खाते हैं, जो कुल जनधन खाताधारकों का 56 प्रतिशत है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में 46 करोड़ जनधन खाते हैं, जो कुल खातों का 78 प्रतिशत है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण