नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) भारत घरेलू क्षमताओं को मजबूत करके चीन को निर्यात बढ़ाने और अपने आपूर्तिकर्ता आधार में विविधता लाकर आयात निर्भरता कम करने की एक बहुआयामी रणनीति अपना रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
बीजिंग से पूरी तरह से संबंध तोड़ना कठिन है, क्योंकि चीनी कच्चे माल देश के औद्योगिक विकास में सहायक हैं। अधिकारी ने कहा, ”भले ही भारत का चीन के साथ पूरी तरह संबंध विच्छेद न हो, लेकिन वह लचीली आपूर्ति श्रृंखला बनाने और निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए अपनी क्षमता विकसित कर रहा है।”
वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने आगे बताया कि भारत मुख्य रूप से कच्चे माल, मध्यवर्ती और पूंजीगत वस्तुओं का आयात करता है। इनमें ऑटो घटक, इलेक्ट्रॉनिक हिस्से और मोबाइल फोन के पुर्जे, मशीनरी तथा संबंधित हिस्से और सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) शामिल हैं। इनका इस्तेमाल निर्यात के लिए तैयार माल बनाने और घरेलू विनिर्माण को समर्थन देने के लिए किया जाता है।
अधिकारी ने कहा, ”चीन जो कुछ भी आपूर्ति कर रहा है, वह भारत के उत्पादन की रीढ़ है। कुछ उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं भी आ रही हैं, लेकिन उनकी संख्या कम है।”
भारत का चीन को निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 के 14.25 अरब डॉलर से लगभग 37 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 में 19.47 अरब डॉलर हो गया। वर्ष 1997-98 में यह निर्यात मात्र 0.71 अरब डॉलर था।
दूसरी ओर, बीजिंग से आयात वित्त वर्ष 2024-25 के 113.44 अरब डॉलर से 16 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 में 131.63 अरब डॉलर हो गया। व्यापार घाटा 2024-25 के 99.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 112.6 अरब डॉलर हो गया है। 1997-98 में आयात मात्र 1.11 अरब डॉलर था।
पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत से चीन को मुद्रित सर्किट बोर्ड, बिजली के उपकरण, दूरसंचार प्रणाली, झींगा, एल्युमीनियम इनगॉट्स, ब्लैक टाइगर झींगा, जहाज और कुछ कृषि वस्तुओं के निर्यात में अच्छी वृद्धि हुई है। हालांकि, चीन के आयात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए निर्यात को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।
दूसरी ओर चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, फार्मास्युटिकल सामग्री, एपीआई, वाहन घटक, दूरसंचार उपकरण, औद्योगिक मशीनरी, कंप्यूटर हार्डवेयर, कार्बनिक रसायन, एक्युमुलेटर और बैटरी, प्लास्टिक कच्चे माल, अवशिष्ट रसायन और थोक दवाओं की आवक बढ़ी है। अधिकारी ने कहा, ”ये सभी वस्तुएं हमारी औद्योगिक प्रक्रिया में जा रही हैं, जैसे-जैसे हम औद्योगीकरण कर रहे हैं, आयात स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा।”
भाषा पाण्डेय
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