मंत्रिमंडल ने 23,437 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी

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मंत्रिमंडल ने 23,437 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी

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  • Publish Date - May 5, 2026 / 09:33 PM IST,
    Updated On - May 5, 2026 / 09:33 PM IST

नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने मंगलवार को रेल मंत्रालय की लगभग 23,437 करोड़ रुपये लागत वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी।

इन परियोजनाओं में नागदा-मथुरा, गुंतकल-वाडी और बुरहवाल-सीतापुर खंडों पर तीसरी एवं चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है।

एक सरकारी प्रेस नोट के मुताबिक, रेल लाइनों की बढ़ी हुई क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। इन बहु-लाइन परियोजनाओं से संचालन सुगम होगा और भीड़भाड़ में कमी आएगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा कि ये रेल खंड भीड़भाड़ वाले रेल मार्गों का हिस्सा हैं और नई लाइनें प्रमुख शहरों एवं कस्बों के बीच परिचालन को अधिक सुगम बनाएंगी।

सरकार ने कहा कि ये परियोजनाएं ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के तहत बहु-स्तरीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं, जिससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों को कवर करने वाली इन परियोजनाओं से भारतीय रेल नेटवर्क में करीब 901 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। इससे लगभग 4,161 गांवों की करीब 83 लाख आबादी को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।

इन परियोजनाओं से महाकालेश्वर मंदिर, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, कूनो राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों की संपर्क सुविधा भी बेहतर होगी।

माल ढुलाई के लिहाज से ये रेल मार्ग कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, इस्पात, लौह अयस्क, कंटेनर और उर्वरक जैसे उत्पादों की ढुलाई के लिए अहम हैं। क्षमता बढ़ने से सालाना छह करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की संभावना है।

रेल मंत्री ने इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय लाभों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे तेल आयात में करीब 37 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन में 185 करोड़ किलोग्राम की कमी होगी, जो करीब सात करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

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