पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान भारत ने एलपीजी आयात स्रोतों में लाई विविधता

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पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान भारत ने एलपीजी आयात स्रोतों में लाई विविधता

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  • Publish Date - June 20, 2026 / 01:45 PM IST,
    Updated On - June 20, 2026 / 01:45 PM IST

नयी दिल्ली, 20 जून (भाषा) पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान भारत ने एलपीजी आयात के स्रोतों में विविधता लाते हुए अमेरिका, ईरान और अन्य देशों से खरीद बढ़ाई। इससे खाड़ी क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई और आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली।

इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि का बड़ा हिस्सा खुद वहन कर घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता था, जिससे देश क्षेत्रीय व्यवधानों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील था।

रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 तक भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग एक-तिहाई हो गई, जो फरवरी में केवल आठ प्रतिशत थी।

यह बदलाव 2025 के अंत में अमेरिका के साथ हुए 22 लाख टन प्रतिवर्ष एलपीजी आपूर्ति समझौते से संभव हुआ, जो भारत की वार्षिक आयात आवश्यकता का लगभग 10 प्रतिशत है। ईरान भी भारत के आयात स्रोतों में फिर शामिल हुआ और अप्रैल में कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब छह प्रतिशत रही। इसके अलावा अर्जेंटीना, चिली, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों से भी आपूर्ति प्राप्त की गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि आयात स्रोतों में विविधता लाने से संघर्ष के दौरान आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली। हालांकि इसके कारण आपूर्ति श्रृंखला लंबी हुई और मालभाड़ा लागत बढ़ गई।

इसके बावजूद व्यवधान का असर मांग पर पड़ा। सीमित उपलब्धता और बढ़ती कीमतों के कारण एलपीजी की खपत फरवरी के 32 लाख टन से घटकर अप्रैल में 24.7 लाख टन रह गई।

वित्त वर्ष 2025-26 में एलपीजी खपत छह प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 3.32 करोड़ टन पर पहुंचने के बाद मार्च और अप्रैल में सालाना आधार पर 13 प्रतिशत घट गई, जबकि मई में इसमें 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर इसका सबसे अधिक असर पड़ा। बाजार आधारित मूल्य व्यवस्था के तहत आने वाले इन उपभोक्ताओं की खपत ऊंची कीमतों और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के कारण घरेलू उपभोक्ताओं की तुलना में अधिक घटी।

क्रिसिल ने कहा कि संघर्ष के कारण वैश्विक एलपीजी कीमतों में भी तेज उछाल आया। हालांकि, इस वृद्धि का पूरा बोझ घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत फरवरी से जून के बीच लगभग 10 प्रतिशत बढ़ी, जबकि 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में 79 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू रसोई गैस की कीमतों में सीमित वृद्धि के कारण तेल विपणन कंपनियों पर लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर बढ़ गया। मई में दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर यह अंतर बढ़कर 651 रुपये प्रति सिलेंडर पहुंच गया। मार्च से मई के दौरान खुदरा ईंधन विक्रेताओं द्वारा वहन किया गया कुल घाटा लगभग 22,000 करोड़ रुपये आंका गया।

भाषा योगेश रमण

रमण