नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहा है, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित कई अन्य देशों ने अतिरिक्त गैस आपूर्ति की पेशकश की है। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का हवाला देते हुए सूत्रों ने कहा कि यह मार्ग भारत के कच्चे तेल के आयात का एकमात्र रास्ता नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक ही समुद्री मार्ग पर निर्भरता के दिन अब लद चुके हैं।
उन्होंने कहा कि रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका, पश्चिम एशिया और गैर-खाड़ी मध्य पूर्वी मार्गों से आपूर्ति ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी एक गलियारे में व्यवधान होने पर आपूर्ति बनी रहे।
सूत्रों ने बताया कि भारत के कच्चे तेल के आयात का केवल लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, जबकि लगभग 60 प्रतिशत अन्य आपूर्ति मार्गों से आता है जो अप्रभावित रहते हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण वैश्विक उथल-पुथल या महामारी के दौरान भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा की कोई कमी नहीं हुई है।
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित कई देशों ने अतिरिक्त गैस आपूर्ति की पेशकश की है और भारत ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश जारी रखे हुए है। भारत ने हाल ही में स्थिर दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे भागीदारों के साथ नई ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था भी की है।
पिछले एक दशक में भारत की रणनीतिक तेल कूटनीति ने अपने आपूर्तिकर्ता आधार को छह महाद्वीपों के 27 देशों से बढ़ाकर 40 देशों तक पहुंचा दिया है। सूत्रों ने कहा कि वे दिन खत्म हो गए हैं जब भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक ही समुद्री मार्ग की स्थितियों के साथ घटती-बढ़ती थी।
भाषा पाण्डेय
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