वायलोर बीजों के शोध एवं विकास पर सालाना एक अरब डॉलर खर्च जारी रखेगी

वायलोर बीजों के शोध एवं विकास पर सालाना एक अरब डॉलर खर्च जारी रखेगी

वायलोर बीजों के शोध एवं विकास पर सालाना एक अरब डॉलर खर्च जारी रखेगी
Modified Date: September 11, 2026 / 06:00 pm IST
Published Date: September 11, 2026 6:00 pm IST

(लक्ष्मी देवी ऐरे)

नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) अमेरिकी कंपनी कोर्टेवा एग्रीसाइंस के बीज कारोबार के एक अक्टूबर को स्वतंत्र इकाई ‘वायलोर इंक’ के रूप में सूचीबद्ध होने की तैयारी के बीच, कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि नई इकाई वैश्विक स्तर पर बीज शोध एवं विकास (आरएंडडी) में सालाना करीब एक अरब डॉलर का निवेश जारी रखेगी।

उन्होंने कहा कि भारत का हैदराबाद अनुसंधान केंद्र भविष्य में एशिया के लिए जीन-संपादन केंद्र के रूप में उभर सकता है।

कोर्टेवा के बीज कारोबार में एशिया-प्रशांत (एपीएसी) और रणनीतिक वृद्धि पहलों के प्रमुख रॉबर्ट कान ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कोर्टेवा इस समय बीज और फसल सुरक्षा से जुड़े शोध एवं विकास पर सालाना करीब 1.4 अरब डॉलर खर्च करती है।

उन्होंने बताया कि इसमें से करीब एक अरब डॉलर बीज कारोबार और लगभग 40 करोड़ डॉलर फसल सुरक्षा के लिए आवंटित किए जाते हैं।

कान ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘अलग होने के बाद, वायलोर का इरादा बीजों के लिए एक अरब डॉलर का वार्षिक आरएंडडी परिव्यय बनाए रखने का है, जबकि फसल सुरक्षा कारोबार अपने खर्च का फैसला स्वतंत्र रूप से करेगा।’’

उन्होंने कहा कि सप्ताहांत समेत बीज आरएंडडी पर रोजाना 30 लाख डॉलर से कुछ कम खर्च होता है। उन्होंने कहा कि बीज कारोबार के आरएंडडी खर्च में कोई कटौती नहीं होगी और कंपनी के बढ़ने के साथ निवेश बढ़ सकता है।

वायलोर भारत में पायनियर ब्रांड के तहत बीजों की बिक्री जारी रखेगी। कंपनी हैदराबाद में एक बहु-फसल अनुसंधान केंद्र संचालित करती है, जिसे अमेरिका के बाहर उसकी सबसे उन्नत आरएंडडी सुविधाओं में से एक बताया जाता है।

इस केंद्र में प्रजनन, डीएनए विश्लेषण और हैप्लोइड तकनीक सहित उन्नत अनुसंधान क्षमताएं हैं।

वायलोर को एक अक्टूबर को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जाना है।

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम


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