एलएनजी के भंडारण टैंक की संख्या बढ़ाने की तैयारी में भारतः पेट्रोनेट सीईओ

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एलएनजी के भंडारण टैंक की संख्या बढ़ाने की तैयारी में भारतः पेट्रोनेट सीईओ

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  • Publish Date - May 4, 2026 / 08:28 PM IST,
    Updated On - May 4, 2026 / 08:28 PM IST

नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) पश्चिम एशिया संघर्ष और बढ़ते जोखिमों के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के भंडारण के लिए नए टैंक बनाने की तैयारी में है। पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का करीब 50 प्रतिशत आयात करता है, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, सीएनजी और रसोई गैस के तौर पर होता है। यह गैस तरलीकृत रूप (एलएनजी) में कतर और अमेरिका जैसे देशों से जहाजों के जरिए लाई जाती है।

देश में प्राकृतिक गैस की मुख्य आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ए के सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बाद कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आपूर्ति प्रभावित हुई है, जो कुल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि इस स्थिति ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश की जरूरत बताई है। ऐसे समय में पेट्रोनेट कई टर्मिनलों पर नए एलएनजी भंडारण टैंक बनाकर अपनी भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही है।

सिंह ने बताया कि कंपनी ओडिशा के गोपालपुर में दो, केरल के कोच्चि में एक और गुजरात के दहेज में अतिरिक्त भंडारण टैंक स्थापित करने की योजना बना रही है। इन परियोजनाओं को पूरा होने में करीब तीन साल लगेंगे। कुल मिलाकर सात नए टैंक प्रस्तावित हैं।

सिंह ने कहा कि अतिरिक्त भंडारण क्षमता से आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी गैस की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, “हमारे पास परिचालन के लिहाज से पर्याप्त भंडारण है लेकिन युद्ध जैसी आपात स्थितियों के लिए नहीं है।”

पेट्रोनेट के पास देश के 23 एलएनजी टैंकों में से 10 टैंक हैं, जिनके जरिए 2025-26 में 2.65 करोड़ टन एलएनजी का प्रबंधन किया गया। इसमें दहेज टर्मिनल पर आठ और कोच्चि में दो टैंक शामिल हैं।

कतर के रास लाफान संयंत्र से एलएनजी की आपूर्ति दो मार्च से ही बाधित है और मार्च-अप्रैल में कोई भी खेप नहीं आई। मई में भी आपूर्ति प्रभावित रहने की आशंका है, जबकि जून को लेकर स्थिति अनिश्चित है।

सिंह ने कहा कि आपूर्ति बाधित होने के कारण प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, जैसे घरेलू रसोई गैस और परिवहन के लिए सीएनजी, तक गैस पहुंचाने के लिए औद्योगिक उपभोक्ताओं को आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी।

उन्होंने कहा कि संकट के दौरान हाजिर बाजार में एलएनजी कीमतें बढ़कर 24-25 डॉलर प्रति यूनिट तक पहुंच गई थीं, जो अब घटकर करीब 16 डॉलर पर आ गई हैं।

सिंह ने कहा कि भारत में गैस की मांग कीमतों को लेकर संवेदनशील है और प्रतिस्पर्धी दरें ही मांग को बनाए रख सकती हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण