नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को कहा कि वृहद आर्थिक स्थिरता एवं आपूर्ति संबंधी उपायों से भारत वित्त वर्ष 2027-28 में फिर से सात प्रतिशत की वृद्धि दर की राह पर लौट सकता है लेकिन यह बाहरी परिस्थितियों में सुधार पर निर्भर करेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान अप्रैल में लगाए गए 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। इसके पीछे ऊर्जा और अन्य जिंसों की ऊंची कीमतों के साथ पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण जारी आपूर्ति बाधाओं को वजह बताया गया।
नागेश्वरन ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के संबंध में आरबीआई के अनुमानों पर इस समय सवाल उठाने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि दिए गए आंकड़ों में ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा, “यदि वृद्धि दर आरबीआई के अनुमान के अनुरूप सात प्रतिशत से नीचे भी जाती है, तो वृहद आर्थिक स्थिरता के उपाय और आपूर्ति संबंधी कदम हमें वित्त वर्ष 2027-28 में फिर से या बाहरी परिस्थितियों में जैसे ही सुधार हो, सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर की राह पर ला सकते हैं।’’
उन्होंने यह भी कहा कि ये अनुमान इस धारणा पर आधारित हैं कि अमेरिका-ईरान संघर्ष से पहले की स्थिति वित्त वर्ष 2027-28 से पहले बहाल हो जाएगी।
नागेश्वरन ने कहा कि यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो अगले वित्त वर्ष के अनुमानों की फिर से समीक्षा की जाएगी।
बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह उचित अनुमान होगा कि यह बजट 2027 में अनुमानित 10.1 प्रतिशत से अधिक रहेगी, क्योंकि खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि का रुझान देखा जा रहा है।
नागेश्वरन ने कहा, “अच्छी खबर यह है कि बाजार मूल्य पर जीडीपी वृद्धि बजट के अनुमान 10.1 प्रतिशत से काफी अधिक रहने की संभावना है।”
सीईए ने कहा कि व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़ा है और 2025-27 में भी इसके और बढ़ने की संभावना है, जिससे चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में उभरता हुआ संकट न केवल आपूर्ति पक्ष पर एक बड़ा झटका है, बल्कि यह मांग पक्ष पर भी संभावित कमी का संकेत देता है।
उन्होंने कहा कि थोक मुद्रास्फीति में आपूर्ति पक्ष से मूल्य दबाव उभरने लगे हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत मौसम-विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा मानसून वर्षा के दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 90 प्रतिशत रहने के अनुमान से मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण पर ऊपर की ओर जोखिम पैदा हो रहा है।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्तु व्यापार और कुल व्यापार घाटा बढ़ गया है।
सीईए ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भी इसी तरह का रुझान, संभवतः और अधिक घाटे के साथ, देखने को मिल सकता है। ऐसा होने से चालू खाते पर और दबाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सफल व्यापार समझौतों, खासकर भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार में प्रगति से उत्पन्न नीतिगत स्पष्टता निर्यात और पूंजी प्रवाह को समर्थन देने की उम्मीद है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता पूंजी प्रवाह की स्थिति पर लगातार दबाव बनाए हुए है।
भाषा योगेश प्रेम
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