नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत ने अब तक यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया सहित अपने किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत डेयरी क्षेत्र में कोई शुल्क रियायत नहीं दी है।
उन्होंने कहा कि भारत का डेयरी क्षेत्र बहुत छोटे और सीमांत किसानों द्वारा संचालित है, जिनके पास सीमित भूमि है और केवल कुछ ही मवेशी हैं। इन किसानों का उत्पादन बहुत कम है और उन्हें यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया या न्यूजीलैंड के बड़े किसानों से संरक्षित करने की जरूरत है।
न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ”यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड सहित दुनिया भर के हमारे सभी एफटीए में भारत का रुख बहुत साफ रहा है। भारत ने कभी भी डेयरी क्षेत्र को नहीं खोला है। इस कमरे में मौजूद हर कोई यह जानता है। दुनिया में हर कोई यह जानता है।”
उन्होंने कहा कि यह स्थिति सभी को पता है और इसमें कुछ भी नया नहीं है।
मंत्री ने कहा कि भारत की विदेश व्यापार नीति के अनुसार सरकार विदेशी कंपनियों को भारत में कच्चा माल या सामग्री लाने, उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने के लिए प्रसंस्कृत करने और फिर उन सामानों का 100 प्रतिशत निर्यात करने की अनुमति देती है। उस उत्पाद को देश में बेचने की अनुमति नहीं है।
गोयल ने कहा, ”इसलिए यह भारतीय बाजार को नुकसान नहीं पहुंचाता है। भारतीय किसानों को नुकसान नहीं पहुंचाता है, बल्कि हमारी विदेशी मुद्रा आय को बढ़ाता है, हमारे युवाओं के लिए रोजगार सृजित करता है। इसलिए यह दोनों देशों के लिए फायदे की स्थिति है।”
भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते में एक निवेश व्यवस्था है, जिसके तहत ओशिनिया देश की कंपनियां डेयरी क्षेत्र से कच्चा माल या सामग्री भारत ला सकती हैं, उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने के लिए उन्हें प्रसंस्कृत कर सकती है और फिर उन वस्तुओं का 100 प्रतिशत निर्यात कर सकती हैं।
न्यूजीलैंड दुनिया के सबसे बड़े डेयरी निर्यातकों में से एक है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत को उसका डेयरी निर्यात कुल 10.7 लाख डॉलर था। एफटीए के तहत, भारत न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) और अन्य सुरक्षा उपायों के साथ न्यूजीलैंड से एल्ब्यूमिन (एक दूध प्रोटीन उत्पाद) और शिशु आहार पर कोटा आधारित शुल्क रियायतें देगा।
भाषा पाण्डेय रमण
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