MANGLORE BLAST/ image source: VishalMayur2 x handle
Mangaluru Cooker Bomb Case: मंगलूरु। कर्नाटक के मंगलूरु में हुए चर्चित कुकर बम धमाके मामले में विशेष एनआईए अदालत ने आतंकी मोहम्मद शारिक को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह घटना 19 नवंबर 2022 को कंकनाडी इलाके में हुई थी, जब शारिक ऑटो रिक्शा में सफर कर रहा था और उसी दौरान उसके पास रखा 3 लीटर का प्रेशर कुकर बम अचानक फट गया। जांच में सामने आया कि शारिक कदरी मंजुनाथ मंदिर में बम रखने जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही विस्फोट हो गया, जिससे एक बड़ा आतंकी हमला टल गया। धमाके में शारिक खुद गंभीर रूप से घायल हो गया था, जबकि ऑटो चालक पुरुषोत्तम पुजारी भी जख्मी हुए थे। दोनों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया और करीब तीन महीने इलाज के बाद शारिक को एनआईए ने अपनी हिरासत में लिया।
NIA Court Sentences Mohammed Shariq To 10 Years In Mangaluru Cooker Bomb Blast Case, ISIS-Inspired Plot Foiled
https://t.co/dXu7leHBvx#MangaluruBlast #MohammedShariq #NIAVerdict #KarnatakaNews #TerrorConviction #ISISIndia #UAPAConviction #IndiaCounterTerrorism #NewsFlashDaily— Vishal Mayur (@VishalMayur2) April 27, 2026
जांच एजेंसी ने मामले की गहन पड़ताल के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे हुए, जिनमें यह भी सामने आया कि शारिक किसी मामूली विस्फोट की योजना नहीं बना रहा था, बल्कि उसका लक्ष्य बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाना था। विशेष एनआईए अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उसे दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई। इस फैसले को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि समय रहते हुए विस्फोट ने एक संभावित बड़ी त्रासदी को टाल दिया। अधिकारियों के मुताबिक, अगर बम अपने पूरे प्रभाव के साथ फटता, तो आसपास के इलाके में भारी जनहानि हो सकती थी।
पुलिस के अनुसार शारिक के पास मौजूद प्रेशर कुकर बम अत्यंत खतरनाक था, जिसमें विस्फोटक जेल, तेज धार वाले कील और बैटरी टर्मिनल लगे हुए थे। इन टर्मिनलों के पॉजिटिव और नेगेटिव तार डेटोनेटर से जुड़े थे। बताया गया कि शारिक ने ऑटो में सफर के दौरान टाइमर सक्रिय कर दिया था, लेकिन तकनीकी कारणों से डेटोनेटर तक पूरी बिजली आपूर्ति नहीं पहुंच सकी। हालांकि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा विस्फोटक जेल सुलग उठा, जिससे धुआं फैलने लगा और फिर धमाका हो गया। अगर डेटोनेटर और विस्फोटक जेल दोनों पूरी तरह सक्रिय हो जाते, तो ऑटो रिक्शा के परखच्चे उड़ जाते, आसपास के वाहन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते और कई लोगों की जान जा सकती थी। इस तरह समय रहते एक बड़ा हादसा टल गया।