भारत 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की राह पर: गिरीश तांती

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भारत 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की राह पर: गिरीश तांती

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 07:19 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 07:19 PM IST

हैम्बर्ग, 23 सितंबर (भाषा) सुजलॉन समूह के सह-संस्थापक गिरीश तांती ने बुधवार को कहा कि भारत 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की राह पर है, लेकिन इसके लिए बिजली ग्रिड के विस्तार में तेजी लाने और परियोजनाओं की नीलामी का सिलसिला बनाए रखने की जरूरत है।

भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसमें 100 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है।

तांती ने हैम्बर्ग में विंडएनर्जी 2026 के दौरान पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा कि देश में नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में सबसे बड़ी बाधा बिजली ग्रिड की तैयारी है।

उन्होंने कहा कि बिजली पारेषण ग्रिड के निर्माण में करीब पांच साल लगते हैं, जो पारंपरिक तापीय या जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण की अवधि के बराबर है।

तांती ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि के अनुरूप ग्रिड के विकास की अवधि को घटाकर 12 से 18 महीने करने की जरूरत है। सौर या पवन ऊर्जा परियोजना को विकसित करने में दो साल से अधिक समय नहीं लगता है।

उन्होंने देश में ग्रिड के तैयार नहीं होने के कारण नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में कटौती का भी उल्लेख किया।

तांती ने कहा, ‘‘हमें बुनियादी ढांचा ग्रिड के विकास में लगने वाले समय के इस अंतर को पाटना चाहिए।’’

तांती ने कहा कि 2030 के 100 गीगावाट लक्ष्य को देखते हुए पवन ऊर्जा परियोजनाओं की नीलामी लगातार जारी रखने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि देश में नीलामी की गति केवल 2030 तक ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी जारी रहनी चाहिए ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

तांती ने कहा, ‘‘बिजली खरीद समझौते पर हस्ताक्षर में देरी से हमें निराश नहीं होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उद्योग के पास 2030 से पहले चालू होने वाली करीब 85 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता की स्पष्ट जानकारी है। अभी करीब पांच साल बाकी हैं और मुझे लगता है कि अन्य परियोजनाओं के लिए भी नीलामी हो रही है।’’

तांती ने कहा कि भारत में पवन ऊर्जा उपकरणों की वैश्विक आपूर्ति क्षमता में करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की क्षमता है।

भारत ने 2025 में करीब चार गीगावाट पवन ऊर्जा उपकरणों का निर्यात किया, जबकि सभी प्रमुख उपकरणों समेत देश की विनिर्माण क्षमता 24 गीगावाट है।

उन्होंने बताया कि 2025 में दुनियाभर में पवन ऊर्जा क्षमता में 165 गीगावाट की वृद्धि हुई।

तांती ने देश में पवन ऊर्जा उपकरणों की विनिर्माण क्षमता का पूरी तरह इस्तेमाल करने के लिए राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन और राष्ट्रीय निर्यात मिशन को तेजी से लागू करने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि भारत का पवन ऊर्जा उपकरण निर्यात 2040 तक करीब 16 गीगावाट तक पहुंच सकता है।

भाषा रमण अजय

अजय