एंटरप्राइज एआई के उपयोग में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर, सुरक्षा गंभीर चुनौती: रिपोर्ट
एंटरप्राइज एआई के उपयोग में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर, सुरक्षा गंभीर चुनौती: रिपोर्ट
नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) भारत कृत्रिम मेधा (एआई) अपनाने के मामले में दुनिया में एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है। एंटरप्राइज एआई/एमएल लेनदेन के मामले में भारत अब अमेरिका के बाद वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है। क्लाउड सुरक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ‘जेडस्केलर’ की एक ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
‘जेडस्केलर थ्रेटलैब्ज 2026 एआई सुरक्षा रिपोर्ट’ के ये निष्कर्ष राजधानी में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ से ठीक एक सप्ताह पहले आए हैं।
इस सम्मेलन में एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, गूगल के सुंदर पिचाई, एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई और क्वालकॉम के क्रिस्टियानो आमोन जैसे विश्व के प्रौद्योगिकी दिग्गजों, नीति-निर्माताओं और नवोन्मेषकों के शामिल होने की उम्मीद है।
जेडस्केलर ने रेखांकित किया कि भारत में एआई की स्वीकार्यता की मजबूत गति के बावजूद सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें ‘एजेंटिक एआई’ का हथियार के तौर पर इस्तेमाल और नवाचार तथा सुरक्षा उपायों के बीच बड़ा अंतर शामिल है।
कंपनी के ‘जीरो ट्रस्ट एक्सचेंज’ मंच पर जनवरी से दिसंबर, 2025 के बीच लगभग 1,000 अरब एआई और मशीन लर्निंग लेनदेन के विश्लेषण पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि उद्यम अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां एआई केवल उत्पादकता बढ़ाने का साधन मात्र नहीं रह गया है। अब यह स्वायत्त और मशीनी गति से होने वाले संघर्षों (साइबर हमलों) का प्राथमिक माध्यम बनता जा रहा है। इस अध्ययन में एआई और एमएल ट्रैफिक का एक साथ परीक्षण किया गया है, क्योंकि उद्यमों की एआई प्रणालियां बड़े पैमाने पर काम करने के लिए मशीन लर्निंग मॉडल पर ही निर्भर होती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय उद्यमों ने जून और दिसंबर, 2025 के बीच कुल 82.3 अरब एआई/एमएल लेनदेन दर्ज किए। यह मात्रा एशिया-प्रशांत (एपीएसी) क्षेत्र की कुल एआई गतिविधियों का 46.2 प्रतिशत है, जो भारत को इस क्षेत्र का निर्विवाद अगुवा बनाती है।
इसमें कहा गया, ‘‘भारत की यह वृद्धि 2025 में सरकार समर्थित निरंतर डिजिटल परिवर्तन प्रयासों के साथ-साथ एआई बुनियादी ढांचे और कौशल विकास में बड़े सार्वजनिक व निजी निवेश के अनुरूप है। एआई-सक्षम कार्यबल के विस्तार और ‘क्लाउड-फर्स्ट’ ढांचा, जो एआई सेवाओं के तेजी से प्रसार में मदद करते हैं, ने संभवतः पिछले वर्षों की तुलना में देश की इस उल्लेखनीय वृद्धि में योगदान दिया है।’
जेडस्केलर ने रिपोर्ट में कहा, ‘‘भारत की यह वृद्धि सरकार समर्थित डिजिटल परिवर्तन प्रयासों और एआई बुनियादी ढांचे व कौशल विकास में बड़े सार्वजनिक तथा निजी निवेश का परिणाम है।’’
भारत में एआई के बढ़ते उपयोग का नेतृत्व मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी और संचार (31.3 अरब लेनदेन), विनिर्माण (15.7 अरब), सेवा (12.6 अरब) और वित्त एवं बीमा (12.2 अरब) क्षेत्रों ने किया है।
इस तेजी के बावजूद, रिपोर्ट एक बड़ी कमी की ओर इशारा करती है कि कई संगठनों के पास अपने सक्रिय एआई मॉडल और उनमें शामिल खूबियों की बुनियादी सूची तक नहीं है। इस कारण उन्हें इस बात की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती कि उनका संवेदनशील डेटा कहां असुरक्षित है।
भारत में जेडस्केलर के ‘सीआईएसओ-इन-रेजिडेंस’ सुब्रत सिन्हा ने कहा कि देश में एंटरप्राइज एआई अपनाने का पैमाना अधिकांश संगठनों की इसे नियंत्रित करने की क्षमता से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है।
भाषा
सुमित अजय
अजय

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