भारत-दक्षिण कोरिया ने बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने पर जताई सहमति
भारत-दक्षिण कोरिया ने बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने पर जताई सहमति
नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) भारत और दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय व्यापार समझौते के समग्र ढांचे के भीतर दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार घाटे की समस्या को दूर करने पर सहमत हुए हैं। वाणिज्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
दोनों देशों ने डिजिटल व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए उप-समूह गठित करने का भी फैसला किया है।
यह मुद्दा भारत-दक्षिण कोरिया व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के उन्नयन को लेकर हुई 12वें दौर की वार्ता में उठा। यह समझौता जनवरी, 2010 में लागू हुआ था।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने माना कि 2010 में भारत-कोरिया सीईपीए लागू होने के बाद से भारत का द्विपक्षीय व्यापार घाटा काफी बढ़ा है और इस मुद्दे को सीईपीए के समग्र ढांचे के भीतर हल करने पर सहमति बनी है।’’
दक्षिण कोरिया को भारत का निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 3.31 प्रतिशत बढ़कर छह अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 5.81 अरब डॉलर था। हालांकि, 2022-25 के दौरान निर्यात वृद्धि नकारात्मक रही थी।
इसी अवधि में आयात 1.38 प्रतिशत बढ़कर 21.35 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 21 अरब डॉलर था।
भारत का व्यापार घाटा 2025-26 में बढ़कर 15.35 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 15.2 अरब डॉलर था। यह घाटा 2023-24 में 14.71 अरब डॉलर, 2022-23 में 14.57 अरब डॉलर और 2021-22 में 9.4 अरब डॉलर था।
मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने अब तक वार्ता में हुई प्रगति की समीक्षा की।
वार्ता की सह-अध्यक्षता वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव कपिल चौधरी और दक्षिण कोरिया के व्यापार, उद्योग एवं ऊर्जा मंत्रालय के व्यापार समझौता नीति महानिदेशक पार्क ग्यून-ओह ने की।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय निर्यातकों को दक्षिण कोरिया में कड़े मानकों, नियमों और प्रमाणन आवश्यकताओं जैसी गैर-शुल्क बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे भारतीय उत्पादों की वहां पहुंच मुश्किल होती है।
दोनों देशों का लक्ष्य मौजूदा 27 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक बढ़ाकर 54 अरब डॉलर करना है। साथ ही व्यापार संबंधों को अधिक संतुलित बनाने पर भी जोर दिया गया है।
भाषा योगेश अजय
अजय

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