भारत को ईयू में सालाना 16.4 लाख टन इस्पात निर्यात का कोटा मिलेगा

भारत को ईयू में सालाना 16.4 लाख टन इस्पात निर्यात का कोटा मिलेगा

भारत को ईयू में सालाना 16.4 लाख टन इस्पात निर्यात का कोटा मिलेगा
Modified Date: September 13, 2026 / 03:28 pm IST
Published Date: September 13, 2026 3:28 pm IST

नयी दिल्ली, 13 सितंबर (भाषा) भारत को यूरोपीय संघ (ईयू) में इस्पात उत्पादों के निर्यात के लिए सालाना कुल 16.41 लाख टन का देश-विशिष्ट शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) मिलेगा। इसमें 6,94,853 टन का कोटा भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत होगा। ईयू द्वारा जारी समझौते के मसौदा पाठ में यह जानकारी दी गई है।

कुल 16,41,470 टन के कोटे में 9,46,616 टन सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) प्रावधान के तहत और 6,94,853 टन एफटीए के तहत होगा।

भारत फिलहाल हर साल करीब 40 लाख टन इस्पात का निर्यात ईयू को करता है।

यह कोटा ईयू के इस्पात की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से निपटने के लिए बनाए गए नए नियमों के तहत दिया जाएगा। ये नियम इस साल एक जुलाई से लागू हुए हैं। इनका उद्देश्य दुनिया में इस्पात का उत्पादन जरूरत से अधिक होने के कारण ईयू के इस्पात उद्योग पर पड़ने वाले असर को कम करना है।

इन नियमों के तहत ईयू में हर साल 1.83 करोड़ टन तक इस्पात का शुल्क-मुक्त आयात किया जा सकता है। इस सीमा से अधिक आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।

मसौदे के अनुसार, सबसे बड़ा देश-विशिष्ट कोटा गैर-मिश्र धातु और अन्य मिश्र धातु के हॉट-रोल्ड शीट एवं स्ट्रिप के लिए 5,09,605 टन है। इसमें एमएफएन के तहत 2,99,197 टन और एफटीए के तहत 2,10,408 टन शामिल हैं।

मसौदे में कहा गया है कि भारत से ईयू में आने वाले इस्पात उत्पादों से संबंधित ये टीआरक्यू ईयू के स्टील विनियमन के लागू होने की तारीख से प्रभावी होंगे।

भारत और ईयू ने इस साल 27 जनवरी को इस समझौते के लिए वार्ता पूरी होने की घोषणा की थी। इसके इस साल के अंत तक हस्ताक्षरित होने और अगले साल से लागू होने की संभावना है।

भाषा योगेश अजय

अजय


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