वर्ष 2047 तक भारत आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या 10 करोड़ होगी : शेखावत

वर्ष 2047 तक भारत आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या 10 करोड़ होगी : शेखावत

वर्ष 2047 तक भारत आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या 10 करोड़ होगी : शेखावत
Modified Date: May 28, 2026 / 04:17 pm IST
Published Date: May 28, 2026 4:17 pm IST

(कुणाल दत्त)

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) भारत के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक व्यापक दृष्टि पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि वर्ष 2030 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इस क्षेत्र का योगदान सात प्रतिशत से अधिक हो जाएगा और 2047 तक विदेशी पर्यटकों की संख्या एक करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ हो जाएगी।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री शेखावत ने बुधवार को ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि आर्थिक वृद्धि, बेहतर बुनियादी ढांचे और पर्यटन विकास के विकेंद्रीकरण के दम पर भारत अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में कमजोर स्तर से निकलकर वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थान हासिल करेगा।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में भारत को पर्यटन से लगभग 35 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आय हुई, जो देश के जीडीपी का करीब एक प्रतिशत है। इसके साथ वित्त वर्ष 2023-24 में यात्रा एवं पर्यटन क्षेत्र ने प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से लगभग 8.4 करोड़ लोगों को रोजगार दिया था।

इस सवाल पर कि क्या वर्ष 2047 तक पर्यटन रोजगार देने और विदेशी मुद्रा कमाने वाले शीर्ष तीन क्षेत्रों में शामिल हो सकता है, शेखावत ने कहा, “मैं ‘सकता है’ शब्द हटाना चाहता हूं। ऐसा जरूर होगा।”

उन्होंने कहा कि जहां विदेशी मुद्रा आय जीडीपी में एक प्रतिशत का योगदान देती है, वहीं समग्र पर्यटन उद्योग का योगदान छह प्रतिशत से थोड़ा कम है। हालांकि, यह वैश्विक औसत 10 प्रतिशत के मुकाबले उतना प्रभावशाली नहीं है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने हमें लक्ष्य दिया है कि 2047 तक पर्यटन का योगदान 10 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए।”

पर्यटन मंत्री ने कहा, “वर्ष 2030 तक हमें हर हाल में सात प्रतिशत तक पहुंचना है। भारत की अर्थव्यवस्था जिस तरह बढ़ रही है और पर्यटन की मांग बढ़ रही है, उससे मुझे पूरा विश्वास है कि 2030 तक हम सात प्रतिशत का स्तर पार कर जाएंगे।”

शेखावत ने कहा कि जिस दिन पर्यटन क्षेत्र का योगदान अर्थव्यवस्था में 10 प्रतिशत हो जाएगा, उस दिन यह रोजगार सृजन के मामले में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बन जाएगा और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को पीछे छोड़ देगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत को लेकर एक ‘नया विमर्श’ गढ़ा है और दुनिया में इसे देखने का नजरिया बदल रहा है।

उन्होंने कहा, “हम इसे (विदेशी पर्यटकों की संख्या) वर्ष 2047 तक 10 करोड़ तक ले जाएंगे।” वर्तमान में भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या करीब एक करोड़ है।

केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या के मामले में भारत अभी भी थाइलैंड, फ्रांस और सिंगापुर जैसे देशों से पीछे है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह तुलना पूरी तरह उचित नहीं है क्योंकि इसमें घरेलू पर्यटन शामिल नहीं हैं।

भारत में वर्ष 2025 के दौरान करीब 300 करोड़ घरेलू यात्राएं की गईं, जिनमें अवकाश, चिकित्सा, विवाह, तीर्थ या अन्य कारणों से की गई यात्राएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “अगर कोई व्यक्ति उज्जैन के महाकाल मंदिर जाता है, तो हम उसे पर्यटक मानने से इनकार नहीं कर सकते। वह घर से निकलकर दूसरे शहर गया, कम से कम एक रात ठहरा और वापस आया। इसका आकलन करूं, तो यह संख्या 294 करोड़ होगी। इस आंकड़े में 2025 के महाकुंभ में गए 66 करोड़ लोग शामिल नहीं हैं।”

शेखावत ने माना कि कमजोर बुनियादी ढांचा, स्वच्छता की कमी, सुरक्षा एवं प्रदूषण को लेकर बनी धारणा, संपर्क की कमी, गुणवत्तापूर्ण होटल कमरों की संख्या पर्याप्त नहीं होना और महंगे होटल विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में बाधा हैं।

उन्होंने कहा कि बढ़ती आर्थिक समृद्धि के कारण अधिक भारतीय देश के भीतर यात्रा कर रहे हैं, जिससे होटल के कमरे भर रहे हैं और मांग बढ़ने से किराया भी बढ़ रहा है। इसका असर खासकर मध्यम वर्ग के विदेशी पर्यटकों पर पड़ता है जबकि अत्यधिक संपन्न या ‘बैकपैकर’ पर्यटक इससे अछूते रहते हैं। ऐसे में विदेशी पर्यटक सस्ते विकल्पों के कारण पड़ोसी देशों का रुख कर लेते हैं।

पर्यटन मंत्री ने कहा, ‘‘भारत के बारे में प्रदूषण और सुरक्षा को लेकर बनी धारणा पूरी तरह सही नहीं है। प्रदूषण कुछ महीनों तक, वह भी दिल्ली में रहता है, जबकि देश के बाकी हिस्से स्वच्छ हैं।’’

उन्होंने भारत की प्राकृतिक सुंदरता, इतिहास, संस्कृति, आध्यात्म, साहसिक गतिविधियां और खानपान जैसी विविधताओं की सराहना करते हुए कहा कि भारतीयों को विदेशी पर्यटकों और ऐतिहासिक स्थलों के प्रति सम्मान एवं देखभाल का भाव विकसित करना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत के लोग स्विट्जरलैंड जैसे दूसरे देशों से रचनात्मक अर्थव्यवस्था और सभी हितधारकों की भागीदारी के बारे में सीख सकते हैं।

शेखावत ने कहा, “यहां ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा जरूर है, लेकिन इसे हर भारतीय के व्यवहार का हिस्सा बनाना होगा। अगर हम ऐसा कर पाएं, तो भारत जैसा देश कोई नहीं है।”

उन्होंने कहा, “आज का ‘इन्क्रेडिबल इंडिया’ (अतुल्य भारत) ही आगे चलकर ‘इनेविटेबल इंडिया’ (अपरिहार्य भारत) बनेगा।”

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


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