भारत-ब्रिटेन एफटीए से भारतीय कारोबार, श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए अवसर खुलेंगे : उद्योग जगत

भारत-ब्रिटेन एफटीए से भारतीय कारोबार, श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए अवसर खुलेंगे : उद्योग जगत

भारत-ब्रिटेन एफटीए से भारतीय कारोबार, श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए अवसर खुलेंगे : उद्योग जगत
Modified Date: July 15, 2026 / 04:46 pm IST
Published Date: July 15, 2026 4:46 pm IST

नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता बुधवार से लागू होने के बाद उद्योग संगठनों ने कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता ब्रिटेन को होने वाले भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को शून्य शुल्क पर बाजार पहुंच उपलब्ध कराएगा। इससे भारतीय कारोबार, खासकर कपड़ा एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते-चप्पल तथा रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

भारत और ब्रिटेन ने बुधवार से मुक्त व्यापार समझौता लागू कर दिया, जिसके तहत कई भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में शून्य आयात शुल्क पर पहुंच मिलेगी। सामाजिक सुरक्षा समझौता भी 15 जुलाई से लागू हो गया है।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) का लागू होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेगा और भारतीय उद्योग के लिए नए अवसर पैदा करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय उद्योग के लिए सीईटीए अवसरों के एक नए युग की शुरुआत है। ब्रिटेन में भारत के 99 प्रतिशत निर्यात को शून्य शुल्क पर बाजार पहुंच मिलने से कपड़ा एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते-चप्पल, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही इंजीनियरिंग उत्पाद, वाहन कलपुर्जों, रसायन और अन्य मूल्यवर्धित विनिर्माण क्षेत्रों के लिए भी नए अवसर सृजित होंगे।’’

बनर्जी ने कहा कि यह समझौता बेहतर बाजार पहुंच, पारदर्शी नियमों और स्थिर व्यापारिक ढांचे के माध्यम से कारोबार के लिए अधिक निश्चितता भी प्रदान करेगा।

उद्योग मंडल फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा, ‘‘यह ऐतिहासिक समझौता विकसित भारत के दृष्टिकोण को मजबूती देता है और सतत आर्थिक वृद्धि, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ गहरे जुड़ाव की देश की आकांक्षाओं को बल प्रदान करता है।’’

उन्होंने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे भारत के लिए उच्च गुणवत्ता वाली आर्थिक साझेदारियां कारोबारी अवसरों के विस्तार, औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक व्यापार एवं निवेश तंत्र में देश की भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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