भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, व्यापार लागत घटेगी : विशेषज्ञ

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, व्यापार लागत घटेगी : विशेषज्ञ

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, व्यापार लागत घटेगी : विशेषज्ञ
Modified Date: July 16, 2026 / 06:35 pm IST
Published Date: July 16, 2026 6:35 pm IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से व्यापार लागत कम होने, ब्रिटिश बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ने और निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों ने यह राय जताई है।

यह समझौता 15 जुलाई से लागू हो गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का ब्रिटेन को निर्यात 13.44 अरब डॉलर रहा था।

समझौते के तहत श्रम आधारित क्षेत्रों जैसे परिधान, कपड़ा, जूते, कालीन, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, अनाज, सब्जियां, फल और मसाले, मछली, मांस तथा प्रसंस्कृत उत्पादों को अब ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क पर पहुंच मिलेगी। इससे पहले इन उत्पादों पर दो से 16 प्रतिशत तक शुल्क लगता था।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 2030 तक दोनों देशों के बीच 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकता है।

डेलॉयट दक्षिण एशिया में भागीदार और लीडर (ट्रेड कॉरिडोर) अनिल तलरेजा ने कहा कि इस समझौते से व्यापार लागत कम होगी, भारतीय निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी और द्विपक्षीय व्यापार को गति मिलेगी। इस समझौते लक्ष्य 2030 तक भारत-ब्रिटेन व्यापार को दोगुना करना है।

उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल शुल्क में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, बौद्धिक संपदा, डिजिटल व्यापार, वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार और सरकारी खरीद जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए आधुनिक और भविष्य के अनुरूप ढांचा तैयार करता है।

तलरेजा ने कहा कि भारतीय कंपनियों को अब निवेश प्रवाह बढ़ाने, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने, नियामकीय बाधाओं को दूर करने और वैश्विक मानकों को पूरा करने की दिशा में तेजी से कदम उठाने होंगे।

फिक्की इस्पात समिति के सह-अध्यक्ष और एएम/एनएस इंडिया के निदेशक एवं बिक्री तथा विपणन उपाध्यक्ष रंजन धर ने कहा कि यह समझौता भारतीय इस्पात क्षेत्र के लिए नए अवसर लेकर आया है, क्योंकि इंजीनियरिंग उत्पादों और वाहन कलपुर्जों को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच मिल रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय इस्पात उद्योग को सरकार की महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप हरित इस्पात में निवेश बढ़ाना होगा, 2027 से लागू होने वाले कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) के लिए तैयार होना होगा और भारत को ब्रिटेन तथा अन्य बाजारों के लिए दुनिया का सबसे प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ इस्पात आपूर्तिकर्ता बनाने की दिशा में काम करना होगा।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ और हाई-टेक गियर्स के चेयरमैन दीप कपूरिया ने कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता भारतीय उद्योग के हितों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को पूरा करता है।

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन लंबे समय से भारत के श्रम आधारित निर्यात, सेवा निर्यात और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रमुख स्रोतों में से एक रहा है। ब्रिटेन एक बड़ा आर्थिक केंद्र है, जिसका लाभ भारतीय कंपनियां व्यापक यूरोपीय और अन्य वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में उठा सकती हैं।

भाषा योगेश अजय

अजय


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