नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत एवं अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर होने और अप्रैल में इसके लागू होने की संभावना है।
इस महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह घोषणा की थी कि अंतरिम व्यापार समझौते के लिए रूपरेखा तय कर ली गई है।
द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए, दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार अगले सप्ताह वॉशिंगटन में मिलेंगे। दोनों दलों के बीच तीन दिवसीय बैठक 23 फरवरी से शुरू होगी।
गोयल ने यहां संवावददाताओं से कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर होने और अप्रैल में इसके लागू होने की संभावना है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर इस समझौते पर हस्ताक्षर के लिए मार्च में भारत की यात्रा कर सकते हैं।
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने यहां आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के एक कार्यक्रम में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जल्द ही हस्ताक्षर होने की संभावना है।
भारत शुक्रवार को महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने के उद्देश्य से अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल हो गया।
गोर ने कहा, ‘‘ व्यापार समझौते से लेकर ‘पैक्स सिलिका’ और रक्षा सहयोग तक, हमारे दोनों देशों के एक साथ काम करने की संभावनाएं वास्तव में असीमित हैं।’’
इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों द्वारा अलग-अलग जारी किए गए संयुक्त बयान में समझौते की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। अब इन्हें कानूनी समझौते में रूपांतरित करने की आवश्यकता है जिसके लिए दोनों पक्ष अगले सप्ताह मिलेंगे।
भारतीय दल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे।
अंतरिम व्यापार समझौते के तहत, दोनों पक्ष आपस में व्यापार किए जाने वाले कई वस्तुओं पर शुल्क रियायतें देंगे।
अमेरिका ने घोषणा की है कि वह भारतीय वस्तुओं पर जवाबी शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। साथ ही रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क को पहले ही समाप्त किया जा चुका है। यह कदम अमेरिका के 50 प्रतिशत के भारी शुल्क का सामना करने वाले घरेलू उद्योग के लिए बड़ी राहत है।
गोयल ने उम्मीद जताई कि अमेरिकी प्रशासन इस महीने शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने का कार्यकारी आदेश जारी करेगा।
राष्ट्रीय राजधानी में 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) के सात घटकों को पेश करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते ने भारतीय निर्यातकों के लिए व्यापार के अपार अवसर खोल दिए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ने कृषि सहित सभी संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा की है।
गोयल ने कहा, ‘‘वह दर (50 प्रतिशत शुल्क) हमारे किसी भी प्रतिस्पर्धी से कम हो जाएगी, यानी अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं या विकासशील देशों से भी कम। साथ ही हमने सभी संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है, तो यह दोनों देशों के लिए फायदे का समझौता है।’’
उन्होंने कहा कि परिधान, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्र ऊंचे शुल्क के कारण प्रभावित हो रहे थे।
उन्होंने इस समझौते को लेकर चिंता जताने पर कांग्रेस के नेता राहुल गांधी की भी आलोचना की।
अंतरिम अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए राहुल गांधी ने एक बार फिर मार्शल आर्ट की एक आधुनिक शैली ‘जिउ-जित्सु’ के ‘ग्रिप’ और ‘चोक’ जैसे कुछ दांवों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘मोदी जी ऐसे समझौता पर क्यों राजी हुए जिसमें भारत इतना कुछ दे रहा है और बदले में बहुत कम मिलता दिख रहा है? इस शर्मनाक आत्मसमर्पण का जवाब प्रधानमंत्री पर डाले गए ‘ग्रिप’ और ‘चोक’ में छिपा है।’’
गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने बिना किसी जवाबी आश्वासन के अमेरिका से आयात को प्रति वर्ष 100 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़ाने पर सहमति क्यों दी है।
इस पर गोयल ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि वह (गांधी) हकीकत से पूरी तरह कटी हुई दुनिया में रहते हैं। यहां मौजूद आप सभी निर्यातक हैं। क्या आप 50 प्रतिशत शुल्क से खुश थे? क्या आपका कारोबार फल-फूल रहा था? क्या आपकी नौकरियां सुरक्षित थीं? क्या तिरुपुर परिधान का निर्यात कर पा रहा था? आपके चमड़ा उद्योग का क्या हाल था, जहां लाखों श्रमिक काम करते हैं? हमारे समुद्री खाद्य निर्यात का क्या हुआ था? सभी श्रम-प्रधान क्षेत्र प्रभावित हो रहे थे।’’
उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत 18 प्रतिशत की दर पर जो सहमति बनाई है, उससे कारोबार फले-फूलेगा।
उन्होंने कहा कि इससे रत्न एवं आभूषण तथा मसालों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
अमेरिका से आयात के संबंध में पीयूष गोयल ने कहा कि भारत को जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) जैसे उच्च-प्रौद्योगिकी उपकरण, कोकिंग कोयला और विमान की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इस समझौते के माध्यम से भारत ने उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयों की खरीद सुनिश्चित की है और ‘‘ बेहद महंगे व जटिल’’ चिकित्सकीय उपकरण कम या शून्य आयात शुल्क पर भारत आएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम 1.4 अरब उपभोक्ताओं की सेवा कर रहे हैं, जो विकास प्रक्रिया के भी सहभागी हैं।’’
संयुक्त बयान के अनुसार, भारत ने अगले पांच वर्ष में अमेरिका से 500 अरब अमेरिकी डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान व उसके कलपुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है।
भाषा निहारिका प्रेम
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