यी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत का बैंकिंग क्षेत्र जुझारू या मजबूत बना हुआ है और ज्यादातर बैंकरों ने जनवरी-जून, 2026 के दौरान गैर-खाद्य ऋण में 11-13 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। रविवार को जारी फिक्की-आईबीए बैंक सर्वेक्षण में यह बात कही गई।
यह सकारात्मक रुझान सुधरते बही-खाते, स्थिर आर्थिक गतिविधियों, खुदरा और एमएसएमई ऋण की मजबूत गति और निजी पूंजीगत व्यय में सुधार के शुरुआती संकेतों पर आधारित है।
इसके विपरीत, औद्योगिक ऋण वृद्धि की रफ्तार मध्यम रहने की उम्मीद है, जो क्रमिक सुधार को दर्शाती है। बुनियादी ढांचे के विकास, विनिर्माण क्षेत्रों और सरकार की अगुवाई वाले पूंजीगत व्यय से निवेश गतिविधियां स्थिर रहने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सावधि ऋण की मांग मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे, रियल एस्टेट, वाहन, दवा, डेटा सेंटर और रक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों से आने की संभावना है।
फिक्की ने बताया कि ज्यादातर उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में मौद्रिक नीति का रुख काफी हद तक स्थिर रहेगा। बैंकों का मानना है कि वर्तमान नीतिगत ढांचा वृद्धि और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए उपयुक्त है।
भाषा पाण्डेय अजय
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