भारत की रूस से कच्चे तेल खरीद 50 प्रतिशत बढ़ी

भारत की रूस से कच्चे तेल खरीद 50 प्रतिशत बढ़ी

भारत की रूस से कच्चे तेल खरीद 50 प्रतिशत बढ़ी
Modified Date: March 11, 2026 / 10:02 pm IST
Published Date: March 11, 2026 10:02 pm IST

नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद में मार्च में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने के बीच भारत के वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग के परिणामस्वरूप यह खरीद बढ़ी है।

जहाज निगरानी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इस महीने लगभग 15 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा, जो फरवरी में 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन था।

भारत, विश्व का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी तेल आवश्यकताओं का 88 प्रतिशत विदेशों से प्राप्त करता है। भारत प्रतिदिन 58 लाख बैरल तेल की खपत करता है, जिसमें से 25 से 27 लाख बैरल सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे पश्चिम एशियाई देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आता है।

इस महत्वपूर्ण मार्ग के जरिये भारत की 55 प्रतिशत खाना पकाने की गैस (एलपीजी) और 30 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का भी परिवहन होता है, जिसका उपयोग बिजली, उर्वरक, सीएनजी और घरेलू खाना पकाने के लिए किया जाता है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद है। इससे भारत को रूस से कच्चे तेल के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

मार्च में भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते लगभग 26 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात करने की उम्मीद थी। वहीं दूसरी ओर, रूस से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।

केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, ‘‘जहाज ट्रैकिंग और विश्वसनीय बाजार सूत्रों के आधार पर, मार्च में रूस से कच्चे तेल का अतिरिक्त आयात 10 से 12 लाख बैरल प्रतिदिन (फरवरी की मात्रा से अधिक) तक पहुंच सकता है। इसका मतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली प्रभावी कमी लगभग 16 लाख बैरल प्रतिदिन तक सीमित रह जाती है।’’

भारत का 2025 में, शुद्ध परिष्कृत उत्पाद निर्यात औसतन लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। इसके अतिरिक्त, वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से कच्चे तेल की खरीद में विविधता लाने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘विविधता और रूस से आपूर्ति के माध्यम से कच्चे तेल की आपूर्ति के जोखिम को आंशिक रूप से कम किया जा सकता है। परिष्कृत उत्पाद की आपूर्ति अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।’’

रितोलिया ने कहा कि आने वाले सप्ताह में एलपीजी की उपलब्धता ही असली चुनौती होगी जिस पर नजर रखनी होगी।

भारत में प्रतिदिन लगभग 10 लाख बैरल एलपीजी की खपत होती है। इसका केवल 40-45 प्रतिशत ही घरेलू स्तर पर उत्पादित होता है, शेष 55-60 प्रतिशत आयात किया जाता है। इन आयात में से लगभग 80-90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

भाषा रमण अजय

अजय


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