भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद तेल संकट के प्रभाव को कम करने में होगी मददगार: एसएंडपी

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भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद तेल संकट के प्रभाव को कम करने में होगी मददगार: एसएंडपी

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  • Publish Date - April 14, 2026 / 03:22 PM IST,
    Updated On - April 14, 2026 / 03:22 PM IST

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) भारत की मजबूत वृहद आर्थिक और वित्तीय बुनियाद कच्चे तेल की कीमतों में लगातार होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने में मददगार हो सकती है। हालांकि, अगर 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो आर्थिक वृद्धि दर में 0.80 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।

इस परिदृश्य के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनियों की ब्याज, कर, मूल्यह्रास और ट्रेडमार्क, पेंटेंट तथा अन्य संपत्ति की समय बढ़ने के साथ लागत में कमी के आकलन से पहले की आय (ईबीआईटीडीए) में 15-25 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। इससे कर्ज में 0.5 गुना से एक गुना तक बढ़ने का अनुमान है। वहीं बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति की गुणवत्ता कमजोर हो सकती है, जिससे एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) लगभग 3.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में युद्ध से उत्पन्न झटकों से भारत अछूता नहीं है। ऊर्जा की ऊंची कीमतों और आपूर्ति में व्यवधान की समस्या कई महीनों तक बनी रह सकती है, जिससे सभी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।’’

हालांकि, कंपनियों का मजबूत बही-खाता, बैंकों में अच्छी पूंजी और मजबूत बाह्य स्थिति इस प्रभाव से बचाव प्रदान करेंगे।

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने तनावपूर्ण स्थिति में ब्रेंट क्रूड की कीमत 2026 में 130 डॉलर और 2027 में 100 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है, जबकि तुलनात्मक आधार पर यह कीमत क्रमशः 85 डॉलर और 70 डॉलर है। एजेंसी को भारत की रेटिंग पर तत्काल किसी प्रभाव की उम्मीद नहीं है। हालांकि, राजकोषीय मोर्चे पर मजबूत प्रयासों को अस्थायी रूप से झटका लग सकता है।

तेल की ऊंची कीमतों से चालू खाते घाटा बढ़ सकता है। अनुमान के अनुसार, 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से यह घाटा जीडीपी के लगभग 0.4 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। जोखिम से बचने की धारणा और बढ़ते आयात बिल के कारण रुपये की विनिमय दर का दबाव भी पड़ सकता है।

एजेंसी ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा संकट का असर कच्चे माल की ऊंची लागत, घटते कॉरपोरेट मार्जिन, बढ़ती उपभोक्ता कीमतों और यदि सरकार सब्सिडी के मामले में हस्तक्षेप करती है तो बढ़ते राजकोषीय दबाव के रूप में सामने आएगा। ईंधन और पेट्रोरसायन को प्रभावित करने वाली संभावित आपूर्ति बाधाओं से भी वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

इन जोखिमों के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था ने 2026 में मजबूत वृद्धि, अच्छी घरेलू मांग और कम मुद्रास्फीति के साथ कदम रखा है। इससे निकट भविष्य में आने वाले झटकों को झेलने में मदद मिलनी चाहिए।

एसएंडपी ने कहा कि मजबूत घरेलू बुनियाद, संभावित सरकारी समर्थन और पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट और बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार किसी भी झटके से निपटने में मददगार होंगे।

हालांकि रसायन, रिफाइनिंग और विमानन जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं। लेकिन बुनियादी ढांचा और जन केंद्रित क्षेत्रों के अपेक्षाकृत स्थिर रहने की उम्मीद है।

पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट ऋण में कमी और बैंकों की बेहतर स्थिति भी प्रणालीगत दबाव को सीमित करने में सहायक मानी जा रही है।

मजबूत पूंजी भंडार और कम गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के साथ भारतीय बैंक झटके को झेलने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। हालांकि, ऋण लागत में मामूली वृद्धि हो सकती है और वित्त वर्ष 2026-27 में लाभ पर दबाव आ सकता है।

कुल मिलाकर, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा कि भारत कुछ महीनों तक तेल की ऊंची कीमतों और आपूर्ति में व्यवधान का सामना कर सकता है। हालांकि, लंबे समय तक चलने वाला झटका वृद्धि, राजकोषीय स्थिरता और बाह्य संतुलन के लिए व्यापक जोखिम पैदा करेगा।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि कि भारत कुछ हद तक दबाव झेलने में सक्षम है। कंपनियों का मजबूत बही-खाता ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के मुकाबले सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं। वहीं, बैंकों की पूंजी की स्थिति और लाभ भी मजबूत है।

एसएंडपी ने कहा, ‘‘भारत की मजबूत बाह्य स्थिति उसे आयात बिल में वृद्धि से होने वाले कुछ झटकों को झेलने की क्षमता देती है। इसलिए, हम सरकारी, कॉरपोरेट और बैंकों की रेटिंग पर तत्काल किसी प्रभाव की उम्मीद नहीं करते हैं। फिर भी, सरकार के राजकोषीय मजबूती के प्रयासों को अस्थायी रूप से झटका लग सकता है।’’

भाषा रमण अजय

अजय