मुंबई, 14 अप्रैल (भाषा) वंचित बहुजन आघाडी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने मंगलवार को दावा किया कि अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण पर न्यायमूर्ति बदर समिति की रिपोर्ट उन समुदायों को ‘मजबूत’ करती है जो पहले ही प्रगति कर चुके हैं और मांग की कि इसे सार्वजनिक किया जाए।
डॉ. बी. आर. आंबेडकर के पोते आंबेडकर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि न्याय देने के बजाय रिपोर्ट उन लोगों को मजबूत करती है जिन्होंने पहले ही प्रगति कर ली है…।’
उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के बाद (जिसमें राज्यों को अनुसूचित जाति श्रेणी के भीतर उप-श्रेणियां बनाने की अनुमति दी गई थी) महाराष्ट्र सरकार ने 2024 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनंत बदर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया।
समिति की रिपोर्ट अभी प्रकाशित नहीं हुई है।
आंबेडकर ने जानना चाहा कि क्या समिति ने सभी हितधारकों से बात की थी। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित नहीं है तो इससे जातियों के बीच दरार पैदा हो सकती है और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि समिति को टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान और स्टैटिस्टिकल सर्वे ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों से मदद लेनी चाहिए थी।
आंबेडकर ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने इस मामले में एक विस्तृत अध्ययन किया है और महाराष्ट्र को इससे सीख लेनी चाहिए।
भाषा
शुभम अविनाश
अविनाश