नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) उद्योग निकाय आइस्टा ने बृहस्पतिवार को बताया कि सितंबर में समाप्त होने वाले 2025-26 सत्र में भारत का चीनी उत्पादन, एथेनॉल के उपयोग में आने वाले हिस्से को छोड़ने के बाद 13 प्रतिशत बढ़कर 2.96 करोड़ टन होने का अनुमान है, लेकिन निर्यात निर्धारित कोटे से कम यानी आठ लाख टन रहने का अनुमान है।
अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (आइस्टा) ने इस सत्र के अपने पहले अनुमान में कहा कि शुद्ध चीनी उत्पादन, फसल वर्ष 2024-25 में उत्पादित 2.62 करोड़ टन से अधिक होगा।
संघ ने कहा कि ‘लॉजिस्टिक्स’ संबंधी दिक्कतों के कारण एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का इस्तेमाल पिछले सत्र के 34 लाख टन से कम रहने की उम्मीद है।
आइस्टा ने कहा कि 47 लाख टन के शुरुआती स्टॉक और 2.96 करोड़ टन के शुद्ध उत्पादन के साथ, कुल चीनी उपलब्धता 3.43 करोड़ टन होगी, जो 2.87 करोड़ टन की अनुमानित घरेलू खपत से अधिक है।
हालांकि, सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी है, लेकिन आइस्टा का अनुमान है कि वर्ष 2025-26 में वास्तविक निर्यात खेप आठ लाख टन की होगी। पहले का बचा स्टॉक 48 लाख टन रहने का अनुमान है।
आइस्टा ने कहा कि देश के शीर्ष चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में उत्पादन पिछले सत्र के 81 लाख टन से बढ़कर ण्क करोड़ 8.1 लाख टन होने का अनुमान है।
दूसरे सबसे बड़े उत्पादक उत्तर प्रदेश में उत्पादन पहले के 93 लाख टन से बढ़कर 94.1 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि तीसरे सबसे बड़े राज्य कर्नाटक में यह उत्पादन 43 लाख टन से बढ़कर 49.1 लाख टन उत्पादन होने की उम्मीद है।
संघ ने कहा कि महाराष्ट्र में पेराई फरवरी के अंत तक जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन पुणे और सोलापुर जिलों में तीन-तीन मिलों और जालना और लातूर की अधिकांश मिलों में यह आगे बढ़ सकती है।
आइस्टा ने आगे कहा कि गुड़ और शक्कर की मजबूत मांग के साथ-साथ अधिक भुगतान के कारण गुड़ इकाइयों में सामान्य से अधिक ‘डायवर्जन’ देखा गया है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय