वाहनों के बीच ‘आपसी संवाद’ से टलेंगे सड़क हादसे, सरकार ने रखा वी2वी संचार प्रौद्योगिकी का प्रस्ताव

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वाहनों के बीच 'आपसी संवाद' से टलेंगे सड़क हादसे, सरकार ने रखा वी2वी संचार प्रौद्योगिकी का प्रस्ताव

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  • Publish Date - August 3, 2026 / 05:17 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 05:17 PM IST

नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए वाहन-से-वाहन (वी2वी) संचार प्रणाली को चरणबद्ध ढंग से लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

यह उन्नत प्रौद्योगिकी वाहनों के बीच सीधा संवाद स्थापित करती है, जिससे संभावित खतरों की समय रहते जानकारी मिल सके और दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

मंत्रालय की मसौदा अधिसूचना के मुताबिक, वी2वी प्रणाली के तहत आसपास चल रहे वाहन आपस में वास्तविक-समय में जानकारी साझा करेंगे। इसमें वाहन की गति, स्थिति, दिशा और ब्रेक लगाने या गति बढ़ाने जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इन आंकड़ों के आधार पर वाहन या चालक को संभावित खतरे के बारे में पहले ही चेतावनी मिल सकेगी।

उदाहरण के तौर पर, यदि आगे चल रहा वाहन अचानक ब्रेक लगाता है या किसी वाहन के साथ टक्कर का खतरा बनता है, तो पीछे आ रहे वाहन को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। इसी तरह, असुरक्षित ढंग से लेन बदलने, ड्राइवर को नजर न आने वाले ब्लाइंड स्पॉट या एंबुलेंस/फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों के पास आने पर भी यह प्रणाली समय रहते सावधान कर सकती है।

मंत्रालय का मानना है कि इस तरह की ‘कनेक्टेड वाहन’ प्रौद्योगिकी से मानवीय त्रुटियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। यह प्रौद्योगिकी भविष्य में ऑटोमैटिक ब्रेकिंग और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडास) जैसी सुविधाओं के साथ मिलकर और अधिक प्रभावी हो सकती है।

मसौदे में वी2वी और अन्य बुद्धिमान परिवहन प्रणाली (आईटीएस) के लिए 5.875 गीगाहर्ट्ज से 5.925 गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड के उपयोग का प्रस्ताव किया गया है। दूरसंचार विभाग पहले ही इस बैंड के इस्तेमाल को लाइसेंस की जरूरत से छूट दे चुका है, जिससे इस प्रौद्योगिकी को लागू करना आसान होगा।

परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन के जरिये इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की रूपरेखा भी पेश की है। इसके तहत अलग-अलग श्रेणी के वाहनों में इस प्रौद्योगिकी को समय के साथ अनिवार्य किया जा सकता है।

मसौदा अधिसूचना के तहत प्रस्तावित समय-सीमा के मुताबिक, एक अक्टूबर, 2027 या उसके बाद निर्मित एल, एम और एन श्रेणी के वे वाहन जिनमें वी2वी संचार प्रणाली लगी है तो उन्हें वी2वी संचार प्रणाली के लिए निर्धारित मानदंड एआईएस-230 का अनुपालन करना होगा।

वहीं, एक अक्टूबर, 2028 या उसके बाद निर्मित एल, एम और एन श्रेणी के सभी वाहनों में एआईएस-230 मानक के अनुरूप वी2वी संचार प्रणाली का लगाया जाना अनिवार्य होगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वी2वी संचार प्रणाली भारत में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है, खासकर उन स्थितियों में जहां ड्राइवर को खतरे का अंदाजा देर से होता है। हालांकि, इसके व्यापक उपयोग के लिए वाहनों में जरूरी हार्डवेयर, मानकीकरण और डेटा सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय