ईरान ने की ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ाने की वकालत

ईरान ने की ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ाने की वकालत

ईरान ने की ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ाने की वकालत
Modified Date: September 11, 2026 / 08:25 pm IST
Published Date: September 11, 2026 8:25 pm IST

नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की वकालत की।

उन्होंने ईरान की भौगोलिक स्थिति, ऊर्जा संसाधनों और परिवहन को ब्रिक्स की आर्थिक संपर्क व्यवस्था के लिए रणनीतिक कड़ी के रूप में पेश किया।

पेजेश्कियान ने ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम’ को संबोधित करते हुए कहा कि समूह को अपनी आर्थिक क्षमता से आगे बढ़कर व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण का अधिक एकीकृत नेटवर्क तैयार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मुद्रा जोखिम से निपटने के तंत्र और आपसी भुगतान व्यवस्था के साथ राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार राजनीतिक झटकों के प्रति कम संवेदनशील होगा।

पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान अपनी भौगोलिक स्थिति और ऊर्जा भंडार के कारण ब्रिक्स की ऊर्जा, खाद्य और परिवहन आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।

उन्होंने व्यापार से जुड़े बुनियादी ढांचे को अधिक एकीकृत करने की जरूरत बताई। इसमें सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण, नियामकीय बाधाओं को कम करना और सीमापार बाजारों को मजबूत करना शामिल है।

ईरानी राष्ट्रपति ने नव विकास बैंक को ब्रिक्स देशों की बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण का प्रमुख माध्यम बनाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि स्थानीय मुद्रा में ऋण और निजी पूंजी आकर्षित करने के लिए गारंटी जैसी व्यवस्थाएं इसमें मदद कर सकती हैं। उन्होंने बड़ी बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाओं के बीमा के लिए 10 अरब डॉलर की शुरुआती पूंजी वाली ब्रिक्स की संयुक्त पुनर्बीमा कंपनी बनाने का भी प्रस्ताव रखा। इससे निजी क्षेत्र का भरोसा बढ़ेगा।

शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए पेजेश्कियान ने कहा कि सीमित संख्या में मुद्राओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण मौजूदा वित्तीय प्रणाली राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील है।

उन्होंने कहा, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक सदस्यों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाना है।’’

ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार सहयोग को वास्तविक निवेश में बदलने के लिए नव विकास बैंक को सदस्य देशों में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण का प्रमुख माध्यम बनना चाहिए। इसके लिए विशेष ऋण व्यवस्था, स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण और निजी पूंजी आकर्षित करने वाली गारंटी व्यवस्था की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय सबसे जटिल दौर में से एक से गुजर रही है। वैश्विक अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के साथ-साथ राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने वैश्विक आर्थिक माहौल को और जटिल बना दिया है।

पेजेश्कियान ने कहा, ‘‘सवाल यह है कि इन चुनौतियों पर ब्रिक्स की क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए? हमारा मानना है कि ब्रिक्स की वास्तविक ताकत केवल उसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार में नहीं है। यह तब अधिक स्पष्ट होती है जब इन क्षमताओं को व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के नेटवर्क में बदला जाए। यानी संभावित सहयोग से आगे बढ़कर व्यावहारिक सहयोग की ओर जाना होगा।’’

उन्होंने कहा कि ईरान का मानना है कि व्यापारिक साझेदारों, वित्तपोषण के स्रोतों और भुगतान के माध्यमों में विविधता लाए बिना आर्थिक मजबूती संभव नहीं है।

पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान पिछले कई वर्षों से व्यापक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और हाल के महीनों में अमेरिका तथा इजराइल की सैन्य कार्रवाई के कारण ये दबाव और गंभीर हो गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इस आक्रामक कार्रवाई ने मानवीय और भौतिक नुकसान के अलावा एक महत्वपूर्ण वास्तविकता को फिर सामने रखा है। आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा से अलग नहीं किया जा सकता।’’

पेजेश्कियान कहा कि जब किसी देश की व्यापार, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा या वित्तीय व्यवस्था राजनीतिक या सैन्य दबाव में आती है, तो उसका असर उस देश की सीमाओं से बाहर भी जाता है और क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को अपने सदस्य देशों और वैश्विक दक्षिण की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत बनाकर ऐसा माहौल तैयार करना चाहिए, जिसमें कोई देश किसी वित्तीय साधन या प्रौद्योगिकी पर एकाधिकार के जरिये दूसरे देश के वैध व्यापार को बाधित न कर सके।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए हमें बिखरे हुए सहयोग से आगे बढ़कर व्यापार से जुड़े बुनियादी ढांचे के क्रमिक एकीकरण की ओर बढ़ना होगा।’’

उन्होंने सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और एकीकरण, व्यापार को सुगम बनाने, नियामकीय एवं प्रशासनिक बाधाओं को कम करने, सीमापार बाजार विकसित करने और निजी क्षेत्र के संयुक्त निवेश को बढ़ावा देने जैसे उपायों को महत्वपूर्ण बताया।

पेजेश्कियान ने कहा, ‘‘हमारा मानकीकरण के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने का भी प्रस्ताव है, ताकि ब्रिक्स केवल कच्चे माल के आदान-प्रदान का बाजार न रहकर मूल्य श्रृंखलाओं और संयुक्त औद्योगिक उत्पादन का नेटवर्क बन सके।’’

उन्होंने कहा कि खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा आर्थिक सुरक्षा के दो बुनियादी स्तंभ हैं। ईरान अपने विशाल ऊर्जा भंडार और महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति के साथ ब्रिक्स की ऊर्जा, खाद्य और परिवहन आपूर्ति श्रृंखलाओं में रणनीतिक साझेदार की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

कृत्रिम मेधा (एआई) के बारे में पेजेश्कियान ने कहा कि ब्रिक्स को केवल प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता नहीं बनना चाहिए। उसे ज्ञान के सृजन और डिजिटल अर्थव्यवस्था के मानक तय करने में भी भूमिका निभानी चाहिए तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की साइबर सुरक्षा मजबूत करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स व्यापार परिषद को केवल संवाद के मंच के बजाय आर्थिक सहयोग के कार्यकारी माध्यम के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

पेजेश्कियान ने कहा कि इसकी विशेष कार्यसमूहों को ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार की वृद्धि दर, व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं की हिस्सेदारी और जुटाई गई निजी पूंजी की मात्रा जैसे स्पष्ट संकेतकों के आधार पर ठोस और मापने योग्य परियोजनाएं तय करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ईरान अपनी महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति और ऊर्जा संसाधनों के साथ ब्रिक्स की आर्थिक संपर्क व्यवस्था में महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि ब्रिक्स वैश्विक अर्थव्यवस्था में वास्तविक ताकत तब बनेगा, जब हमारा सहयोग सदस्य देशों के लोगों के जीवन और वास्तविक अर्थव्यवस्था में अनुबंधों, कारखानों और बंदरगाहों के रूप में दिखाई देगा।’’

ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को इसमें शामिल किया गया। इंडोनेशिया 2025 में इसका सदस्य बना।

बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने।

ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है। इसमें दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जो वैश्विक आबादी के करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती हैं।

भाषा योगेश रमण

रमण


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